मनरेगा मजदूरों के साथ किसानों के लिये भी हो रहा उपयोगी साबित!

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:- अनिल शर्मा की रिपोर्ट

मनरेगा रोजगार मुहैया कराने वाला सबसे बड़ी संस्था तो है ही किसानों के कल्याण का सबसे उपयुक्त प्रस्तुत है एक रिपोर्ट

भारत सरकार की योजना मनरेगा गरीव के जीवन के अंधकार को मिटाने का एक प्रमुख माध्यम बनाया हुआ है।कोरोना काल से तो यह उन परिवारों के घरो में दोनों शाम का चूल्हा को जलने से नही बन्द होने दे रहा है।नवादा जिला के झुनाथी पंचायत के एक पैन में लगभग 35 से 40 मजदूर काम कर रहे थे।काम करने वाला मजदूर धर्मेंद्र का कहना था कि बाहर मजदूरी करते थे कोरोना के बजह से बंद हुआ घर आये उसी समय से यही काम मिल रहा है फिर बाहर जाने का विचार ही नही आया।एक महिला मजदूर जो चिमनी भत्ता पर दूसरे राज्य में काम करती थी घर आई तब से यही उसे काम मिल रहा है।15 दिन पर खाता में पैसा आ जाता है।

झुनाठी पंचायत का मुखिया जो पुनः इस पंचायत चुनाव में मुखिया निर्वाचित हुआ बड़े गर्व से कहता है कि मनरेगा उसे पुनः मुखिया बना दिया।मुखिया कहता है कि पंचायत के हर गाव में जाकर काम के इच्छुक ब्यक्ति से आवेदन लेकर काम देते है जो मनरेगा से ही सम्भव हो सका।

गाव के एक युवा किसान को पैन की खुदाई होने से काफी खुशी है।किसान का कहना था कि पैन की दुर्दशा खेतो तक पानी नही पहुंचने देता था अब उनके खेतो में नहर का पानी रवि फसल में भी पहुंच जाएगा।

नवादा सदर के कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा कि सरकार के गाइडलाइन का अक्षरशः पालन करते है।कोरोना काल मे गाव गाव घूमकर इच्छुक ब्यक्तिओ को काम दिया।जॉब कार्ड बनाकर भी देने की आवश्यकता पड़ी दिया।कोरोना के तीसरी लहर की आहट सुनाई देने लगी तो कार्यस्थल पर सुरक्षा के तमाम मानक का पालन कर रहे है।

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