:- रवि शंकर अमित!
जिला पदाधिकारी बेगूसराय श्री श्रीकांत शास्त्री की अध्यक्षता में आज दिनांक 11.07.2026 को समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभागार में जीविका की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जीविका के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा करते हुए जिला पदाधिकारी ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, स्वरोजगार के विस्तार तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक गति देने की आवश्यकता है।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में अब तक 38,532 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे 4,56,083 परिवार जुड़े हैं। इनके अतिरिक्त 2,148 ग्राम संगठन तथा 55 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वित्तीय समावेशन के तहत 32,129 समूहों के बचत खाते खोले गए हैं तथा बैंक क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से समूहों को अब तक कुल ₹2,561 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की समीक्षा में बताया गया कि जून 2026 तक 1,82,274 किसानों की प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8,200 मीट्रिक टन हरित उर्वरक का उत्पादन किया गया, जिसमें से 7,014 मीट्रिक टन का उपयोग किया जा चुका है।
बैठक में गैर-कृषि आजीविका गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि ‘दीदी की रसोई’ का संचालन बेगूसराय सदर एवं बछवाड़ा में किया जा रहा है, जबकि बरौनी में यह कैफे के रूप में संचालित है। वहीं बेगूसराय सदर, बरौनी तथा चेरिया बरियारपुर में संचालित ‘दीदी का सिलाई घर’ केंद्रों में 235 सिलाई मशीनों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए 2,84,921 पोशाक सेट तथा अन्य जिलों के लिए 5,180 ड्रेस सेट तैयार कर उपलब्ध कराए गए हैं।
कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा में बताया गया कि जून 2026 तक डीडीयू-जीकेवाई, आरसेटीआई तथा प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से 5,893 युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 2,835 युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है। इस कार्य में विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त हो रहा है।
सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत पारंपरिक रूप से ताड़ी एवं देशी शराब के व्यवसाय से जुड़े परिवारों सहित कुल 5,095 ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। समावेशी आजीविका योजना के अंतर्गत चार प्रखंडों के 1,132 अत्यंत निर्धन परिवारों को ₹27,500 मूल्य की परिसंपत्तियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त जिले के आठ प्रखंडों में दीदी अधिकार केंद्र तथा चार प्रखंडों में जीविका लाइब्रेरी संचालित हैं, जिनसे 3,541 शिक्षार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने विभिन्न योजनाओं से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर विशेष बल दिया। उन्होंने प्रखंड-सह-अंचल कार्यालयों की साफ-सफाई से संबंधित लंबित बिलों के त्वरित भुगतान के लिए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। समूहों के बचत एवं ऋण खातों के शीघ्र संचालन हेतु जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया। मनरेगा के अंतर्गत संचालित दीदी की नर्सरी के लंबित भुगतान तथा पौधों के उठाव में आ रही समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। साथ ही बलिया, खुदावंदपुर, बखरी एवं बीरपुर सहित विभिन्न प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र, सिलाई केंद्र, दीदी अधिकार केंद्र एवं जीविका लाइब्रेरी के संचालन हेतु आवश्यक सरकारी भवन एवं भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया।
बैठक में जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक श्री अविनाश कुमार ने जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जीविका के सभी जिला स्तरीय प्रबंधक उपस्थित रहे, जबकि सभी प्रखंड परियोजना प्रबंधक वर्चुअल माध्यम से समीक्षा बैठक में शामिल हुए।




