कश्मीर से पहले बिहार के बाजारों में छाया लाल सेब, पश्चिम चम्पारण के किसानों ने रची सफलता की नई मिसाल!

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रिपोर्ट – मनोज कुमार


बेतिया से खबर है जहां वर्षों तक सेब की पहचान कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी रही, लेकिन अब बिहार की धरती पर भी लाल-लाल सेब लहलहा रहे हैं। पश्चिम चम्पारण के किसान सेब उत्पादन में नई सफलता की कहानी लिख रहे हैं। जिले के नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव निवासी किसान शिशिर दूबे ने दो वर्ष पहले करीब 70 एचआरएमएन-99 (HRMN-99) किस्म के सेब के पौधे लगाए थे। आज उनके बगीचे में पौधे फलों से लदे हैं और प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक उत्पादन मिल रहा है।
शिशिर दूबे बताते हैं कि शुरुआत में लोगों को विश्वास नहीं था कि बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती संभव है, लेकिन अब उनके बगीचे में लाल और आकर्षक सेब देखकर लोग खेती की तकनीक जानने पहुंच रहे हैं। वहीं बेतिया के व्यवसायी एवं पर्यावरण प्रेमी मेराजुल हक ने भी अपने परिसर में सेब के पौधे लगाकर सफलता हासिल की है। उनका मानना है कि फलदार पौधे पर्यावरण संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय का भी बेहतर माध्यम बन सकते हैं।
मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के किसान विजय गिरी भी इस खेती से लाभ कमा रहे हैं। बिहार में तैयार होने वाले सेब जून-जुलाई में ही बाजार में पहुंच जाते हैं, जबकि कश्मीर और हिमाचल के सेब सितंबर-अक्टूबर में आते हैं। यही कारण है कि किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में यह सेब 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गर्म जलवायु के अनुकूल HRMN-99 किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है और भविष्य में राज्य को सेब उत्पादन की नई पहचान दिला सकती है।

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