:- रवि शंकर अमित!
बच्चों के समग्र स्वास्थ्य संरक्षण एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन ‘आरबीएसके 2.0’ के आलोक में शनिवार को सदर अस्पताल, बेगूसराय में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार द्वारा की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आरबीएसके 2.0 के विभिन्न प्रावधानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली तथा बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन में इसके महत्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उपस्थित चिकित्सकों, नर्सों एवं फार्मासिस्टों को नई प्रणाली के संचालन, डेटा प्रबंधन एवं उपचार अनुश्रवण से संबंधित तकनीकी जानकारियां प्रदान की गईं।
कार्यक्रम में बताया गया कि आरबीएसके 2.0 के तहत विकसित पोर्टल को शिक्षा विभाग के यू-डायस प्लस (UDISE+) तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण ट्रैकर प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है। इस महत्वपूर्ण डिजिटल एकीकरण के माध्यम से विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य सूचनाओं का रीयल-टाइम आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। इससे बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की सतत निगरानी, समयबद्ध उपचार एवं बेहतर फॉलो-अप सुनिश्चित होगा। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।
प्रशिक्षण के दौरान आरबीएसके 2.0 की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि अब कार्यक्रम का दायरा केवल ‘4Ds’ अर्थात जन्मजात दोष, रोग, कमियां एवं विकासात्मक विलंब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों, व्यवहार संबंधी समस्याओं तथा किशोर स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है। यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य को समग्र दृष्टिकोण से देखने और समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे के लिए डिजिटल हेल्थ कार्ड विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक उसकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का व्यवस्थित संधारण किया जा सकेगा। इससे उपचार इतिहास, स्क्रीनिंग रिपोर्ट, रेफरल एवं फॉलो-अप की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी और बच्चों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आरबीएसके 2.0 बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक है। शिक्षा विभाग एवं आईसीडीएस के साथ डेटा एकीकरण से बच्चों की स्वास्थ्य निगरानी अधिक प्रभावी एवं सुगम बनेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
आरबीएसके जिला समन्वयक डॉ. रतीश रमन ने कहा कि रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध होने से बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की शीघ्र पहचान, समयबद्ध रेफरल तथा उपचार की प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। इससे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक सुदृढ़ बनेगी।
जिला स्वास्थ्य प्रबंधक नाशिम रजी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। आरबीएसके 2.0 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षक सन्नी प्रसाद द्वारा प्रतिभागियों को आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि, बच्चों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया, रेफरल प्रबंधन प्रणाली, डिजिटल हेल्थ कार्ड निर्माण तथा समयबद्ध उपचार व्यवस्था से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
इस अवसर पर जिले के सभी आरबीएसके चिकित्सक, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट एवं संबंधित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आरबीएसके समन्वयक सविता कुमारी के साथ पिरामल फाउंडेशन के ज्ञानोदय प्रकाश, जयंत चौधरी एवं दीपक मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आरबीएसके 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के लाखों बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, समय पर रोगों की पहचान सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से बाल स्वास्थ्य संकेतकों में सकारात्मक सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त होने की उम्मीद व्यक्त की गई।




