रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय
आरा। शहर की जनता इन दिनों विकास नहीं, बल्कि धूल और प्रदूषण की मार झेल रही है। पिछले एक महीने से अधिक समय से सड़क निर्माण के नाम पर मिश्रित गिट्टी सड़क पर बिखरी पड़ी है। हालत यह है कि सुबह से लेकर रात तक सड़क पर केवल धूल का गुबार उड़ता रहता है।
सड़क से गुजरने वाले पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग लगातार धूल निगलने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि नाक, आंख और गले में जलन के साथ-साथ सांस संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। चिकित्सकों के यहां भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की चर्चा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता की इस परेशानी को देखने वाला कोई नहीं है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता सड़क से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। वहीं जिलाधिकारी, नगर आयुक्त समेत अन्य अधिकारी वातानुकूलित वीआईपी वाहनों से आते-जाते हैं, लेकिन सड़क पर उड़ रही धूल और जनता की परेशानी पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है।
लोगों का आरोप है कि नगर निगम और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण शहरवासी प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर हैं। आखिर सड़क निर्माण कार्य कब पूरा होगा और लोगों को धूल से कब राहत मिलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
जनता पूछ रही है— क्या विकास का मतलब लोगों को धूल और बीमारी सौंप देना है?




