नवादा/ सोनू सिंह ।
अंतिम किस्त जारी करने के नाम पर 10 हजार की रिश्वत लेते आवास सहायक गिरफ्तार, मेसकौर प्रखंड कार्यालय गेट पर निगरानी टीम ने दबोचा
मेसकौर (नवादा), प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुक से अंतिम किस्त जारी कराने के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत मांगना एक आवास सहायक को महंगा पड़ गया। बुधवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस), पटना की टीम ने मेसकौर प्रखंड कार्यालय के मुख्य गेट के समीप आवास सहायक बीरू कुमार को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया और लोगों की भारी भीड़ जुट गई।
गिरफ्तार बीरू कुमार मेसकौर प्रखंड की मीरजापुर एवं पाण्डेय बीघा पंचायत में आवास सहायक के रूप में कार्यरत था। वह मूल रूप से गया जिले के पहाड़पुर का निवासी बताया जाता है। उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि निगरानी डीएसपी मिथलेश कुमार ने की है।
जानकारी के अनुसार, मीरजापुर पंचायत के पवई गांव निवासी स्व. बलवंत सिंह के पुत्र धनंजय कुमार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था। उन्हें योजना की दो किस्तों में 45 हजार और 40 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी थी। आवास निर्माण पूरा होने के बाद अंतिम किस्त के 45 हजार रुपये का भुगतान होना बाकी था। आरोप है कि अंतिम किस्त जारी करने और जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले आवास सहायक द्वारा 10 हजार रुपये की मांग की जा रही थी।
धनंजय कुमार ने 12 मई को निगरानी थाना, पटना में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई गई।
बुधवार को पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता रिश्वत की राशि लेकर मेसकौर प्रखंड कार्यालय पहुंचा। फोन पर सूचना मिलने के बाद आवास सहायक कार्यालय से बाहर निकलकर गेट के पास पहुंचा और जैसे ही उसने 10 हजार रुपये अपने हाथ में लिए, पहले से घात लगाए निगरानी टीम ने उसे दबोच लिया। टीम ने मौके पर ही राशि बरामद कर गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी कीं।
छापेमारी दल में डीएसपी मिथलेश कुमार, डीएसपी योगेंद्र कुमार, सब इंस्पेक्टर आशीष कुमार, शशि कुमार, एएसआई राजीव नयन दुबे, कृष्ण मुरारी कश्यप समेत अन्य कर्मी शामिल थे। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच पूछताछ के लिए गया स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।




