रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के अरेर थाना क्षेत्र अंर्तगत मधवापट्टी गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज के दो पहलुओं को उजागर किया है। एक तरफ जहां किसी ने एक नवजात बच्ची को झाड़ियों में लावारिस छोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर एक मुस्लिम परिवार ने उसे अपनाकर ममता का आंचल प्रदान किया। गांव के मोहम्मद अनीश की पुत्री नदी किनारे से गुजर रही थी, तभी उसे झाड़ियों से किसी मासूम की किलकारी सुनाई दी झाड़ियों के पास पहुंचने पर उसने देखा कि एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी हुई जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। उसने ममता से अभिभूत होकर नवजात को ममता पदान करते हुऐ अपने सिने से लगाली और बिना देर किएतुरंत अपने घर ले आई। तीन बेटों और एक बेटी के पिता मोहम्मद अनीश ने इस बच्ची को अपनी दूसरी बेटी के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने न केवल उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया, बल्कि उसे फातिमा नाम देकर एक नई पहचान भी दी। लेकिन जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर फैली, वैसे ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की टीम औपचारिकताएं पूरी करने गांव पहुंची। नियमानुसार बच्ची को फिलहाल सरकारी संरक्षण में ले लिया गया है। जब टीम फातिमा को ले जा रही थी, तब अनीश के परिवार की नम आँखें चीख-चीख कर कह रही थीं कि उनका लगाव इस मासूम से कितना गहरा हो चुका था उसे समझने का प्रयास किया जाय। जिसके बाद स्थानीय लोगों में चर्चा छिड़ गई कि यह घटना गिरते मानवीय मूल्यों के बीच मानवता की बची हुई उम्मीद की एक किरण है। जहां एक निर्दयी माँ ने बेटी को बोझ समझकर लावारिस अबस्था मे फेंक दिया, वहीं अनीश के परिवार ने उसे अपनाकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता। फातिमा को मिला यह नया जीवन समाज के लिए एक प्रेरणा है। या यूं कहें कि यह हृदयस्पर्शी घटना मानवता और प्रेम की एक अनूठी मिसाल पेश करती है, जो हमें याद दिलाती है कि इंसानियत का रिश्ता मजहब और खून के रिश्तों से कहीं ऊपर होता है।




