रिपोर्ट – अमित कुमार!
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान साल 2021 में बिहार समेत पूरा देश भयावह स्थिति से गुजर रहा था। अप्रैल-मई 2021 में लॉकडाउन लगा हुआ था और सरकार ने भीड़ जुटाने, बिना जरूरी काम बाहर निकलने और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक लगा रखी थी। इसी दौरान बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राघोपुर से विधायक तेजस्वी यादव अपने क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने नाव से निकले थे। उस समय राघोपुर दियारा इलाका गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित था और कई गांव टापू बन गए थे।
तेजस्वी यादव ने नाव पर सवार होकर कई पंचायतों का दौरा किया और लोगों से मुलाकात की। उनके साथ राजद के स्थानीय नेता और काफी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे। इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। वीडियो में साफ दिख रहा था कि नाव पर और घाटों पर काफी भीड़ जमा थी। कई लोगों ने मास्क भी नहीं लगाया था और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं हो रहा था।
इस दौरे के बाद प्रशासन हरकत में आया। राघोपुर थाने में तेजस्वी यादव और उनके साथ मौजूद अज्ञात लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम 1897, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और आईपीसी की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि तेजस्वी यादव ने लॉकडाउन के नियमों को तोड़ा, बिना प्रशासन की अनुमति के भीड़ इकट्ठा की और लोगों की जान को खतरे में डाला। उस समय बिहार में धारा 144 लागू थी और किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि पर रोक थी।
इस एफआईआर के बाद बिहार की सियासत गरमा गई थी। राजद ने इसे बदले की कार्रवाई बताया था। पार्टी का कहना था कि तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता होने के नाते जनता के बीच जा रहे थे और सरकार की नाकामी उजागर कर रहे थे, इसलिए उन्हें टारगेट किया गया। तेजस्वी ने खुद भी कहा था कि वे जनता के दुख-दर्द में शामिल होने गए थे, न कि रैली करने। अगर बाढ़ पीड़ितों से मिलना अपराध है तो वे ये अपराध बार-बार करेंगे।
वहीं भाजपा और जदयू नेताओं ने पलटवार किया था। उनका कहना था कि कानून सबके लिए बराबर है। जब आम आदमी पर लॉकडाउन तोड़ने पर जुर्माना लग रहा है तो नेता प्रतिपक्ष को छूट कैसे मिल सकती है। उस समय बिहार सरकार में मंत्री रहे रामसूरत राय ने कहा था कि महामारी के समय नियम तोड़ना जनता की जान से खिलवाड़ है।
यह मामला दर्ज होने के बाद पटना सिविल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। पिछले तीन सालों में कई तारीखें पड़ चुकी हैं। कोर्ट ने समय-समय पर तेजस्वी यादव को हाजिर होने का निर्देश दिया है। उनके वकील इस मामले को राजनीतिक बताकर खारिज करने की मांग कर चुके हैं।



