रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
मधुबनी जिले के ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक जिला संयोजक कमेटी के द्वारा अगस्त क्रांति दिवस मनाया गया। जिसे संबोधित करते हुए राज्य कमिटी सदस्य कामरेड प्रेम कुमार झा ने कहा 9 अगस्त 1942 को शुरू किया गया भारत छोड़ो आंदोलन जिसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। एक निर्णायक आंदोलन था। जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी। आंदोलन क्रिप्स मिशन की सफलता का प्रत्यक्ष जवाब था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत को सीमित स्वशासन की पेशकश की थी। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ऐतिहासिक टोक्यो भाषण को उद्देश्य उदृध्रृत करना आवश्यक है। जहां उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता भारत की सरकार को सभी धर्म के प्रति पूर्णतया तटस्थ और निष्पक्ष रवैया अपनाना चाहिए और प्रति व्यक्ति को किसी विशेष को धार्मिक विश्वास को माननें या उनका पालन करने की स्वतंत्रता देना चाहिए। समारोह को संबोधित करते हुए जिला संयोजक कामरेड बेचन राम ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस अहिंसा पर जोड़ देने के साथ भारत छोड़ो आंदोलन को नैतिक बल, जन आंदोलन, के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन प्राप्त करने की गांधीवादी सिद्धांत को पूर्ण रूप से मूर्त रूप दिया। इसके विपरीत सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में फॉरवर्ड ब्लॉक अधिक उग्रवादी और टकराव वाला रुख अपनाया था। बॉस को धुरी शक्तियों के साथ गठबंधन और सस्ता संघर्ष पर उनका ध्यान गांधीवादी सिद्धांतों से एक क्रांतिकारी प्रस्थान का प्रतिनिधित्व करता था। जो युद्ध कालीन भू राजनीतिक की जटिल गतिशीलता और तत्काल मुक्ति की आवश्यकता को दर्शाता था। बैठक को पंचू पासवान, मोहम्मद अकबर, रहिका प्रखंड संयोजक संतोष शाह, संयोजक गुड्डू मंडल, अखिलेश झा, मुकेश मंडल, अक्षय लाल राम, बिलट पासवान ,सोंधारी राम, मल भोगीया देवी ने संबोधित किया और सुभाष चन्द्र बोस को शिद्दत से याद करते हुए उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर देश की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखने का सप्त लिया।




