लोकतांत्रिक व्यवस्था के त्यौहार में यह वाकया एक बड़ा मजाक से कम नही है..

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रिपोर्ट- संतोष तिवारी!

लोकतांत्रिक व्यवस्था के त्यौहार में यह वाकया एक बड़ा मजाक से कम नही है..वैशाली लोकसभा क्षेत्र से मुख्य धारा के दो राजनीतिक दलों के द्वारा प्रत्यासी के नाम का घोषणा होने के बाद एक ने कहा कि देहाती कहावत है न राई दूसे ला..अ , न सरसों सराहे ला..अ स्थिति बन गयी है वैशाली में .. तो दूसरे ने कहना शुरू किया की एक धनबल है तो दूसरा बाहुबल अब इसमें जनता किधर जाना चाहेगी … तो फट से तीसरे ने बोला कि क्या यहाँ की जनता नोटा दबाएगी … पर ऐसा हो नही सकता .. इतने में सरसराते हुए शर्मा जी पहुंचे और बोले क्यों नही हो सकता अगर मुख्य धारा के दोनों प्रत्याशियों से अधिक वोट अगर नोटा को पड़ जाए तो फिर क्या होगा .. इतने में कई लोग मिलकर फुसफुसाने लगे और कहने लगे देखते जाइये आगे आगे होता है क्या ..

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