जमीन उपलब्ध होने के आठ साल बाद भी स्वास्थ्य उप केंद्र का निर्माण नहीं!

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अरविंद कुमार

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड स्थित प्रदूमन छपरा प्राथ्मिक उप स्वास्थ्य केन्द्र बनाने हेतु दिये जमीन को लेकर एक दैनिक समाचार पत्र में गलत खबर चलाने से मामला तुल पकड़ लिया।इस संदर्भ में भूमि दाता ई0 शूधांशू कुमार भारद्वाज ने पत्रकारों के समक्ष बताया कि बथना पंचायत के प्रदूमन छपरा उप स्वास्थ्य केन्द्र बनाने हेतु विगत वर्ष 2013 में मैने महामहिम राज्यपाल के नाम से वयनामा कर दिया गया है। वहीं उन्होंने बताया कि वयनामा के वर्ष 2013 में पदस्थापित जिलाधिकारी मोतिहारी, सिविल सर्जन मोतिहारी,प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी केसरिया सहित सभी पदाधिकारी ने भूमि दाता ई0 शूधांशू कुमार भारद्वाज को जमीन देने की मांग की। वहीं भूमि दाता ई0 शूधांशू कुमार भारद्वाज ने जमीन को मिले आवेदन के तत्पश्चात महामहिम राज्यपाल द्वारा सिविल सर्जन सह सदर सचिव जिला स्वास्थ्य समिति पूर्वी चंपारण मोतिहारी को वयनामा कर दिया। बावजूद इसके आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी नवसृजित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केन्द्र प्रदूमन छपरा की जमीन पर निर्माण कार्य शूरु नहीं हो सका है। वहीं जिला के स्वास्थ महकमे के किसी पदाधिकारी के द्वारा एक समाचार पत्र में गलत खबर छपवा कर यह साबित कर दिया गया है कि प्रदूमन छपरा में भूमि निर्गत नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं कराया गया।जबकि जमीन दाता ई0 शूधांशू कुमार भारद्वाज ने इस खबर की निंदा की और विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया। वहीं स्थानीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ0 अर्चना कुमारी ने बताया कि प्रदूमन छपरा में नवसृजित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र के लिए जमीन दान में प्राप्त है।जिसको लेकर स्थानीय विधायक शालीनी मिश्रा ने विधानसभा में भवन निर्माण को लेकर आवाज उठायी थी। हालांकि मौका-ए-वारदात पर एक नया रिसर्च सामने आया है। पंचायत में बोर्ड लगा है पर भवन के लिए जमीन नहीं की भ्रमक खबर फैला दी जा रही है। वहीं आठ वर्ष में भवन का निर्माण नहीं हुआ जिम्मेवार कौन?अभी प्राथ्मिक उपस्वास्थ्य केन्द्र एक प्राईवेट भवन में मनमानी चलती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र पर कभी कभी चलता है।धरातल पर कम और कागज पर ज्यादा चलता है। जहां एएनएम वीना तिवारी की प्रतिनियुक्ति की बात उभर कर सामने आ रही है। मनमाने तरीके से उपस्वास्थ्य केन्द्र को चलाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है,जो विभागीय अधिकारियों के जांच का विषय है।

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