उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के, बाद विधानसभा चुनाव की दस्तक!

SHARE:

कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!

75 मे 67 पंचायत अध्यक्ष बीजेपी के, तो क्या यह विधानसभा का आगाज है!

उत्तर प्रदेश में जिसकी सत्ता
रही है, उस पार्टी ने ही सबसे ज्यादा पंचायत अध्यक्ष काबीज किया है!

तो क्या लखनऊ सत्ता की चाभी पंचायत चुनाव से निकलता है!

पिछले 3 महीने से सत्ता के लिए उत्तर प्रदेश में संघर्ष छेड़ा था पंचायत अध्यक्ष चुनाव के बाद शायद समाप्त हो गई। लेकिन नजर डालते हैं पूरी चुनाव पटकथा पर कोरोना की पटरी पर लोग बाग जहां एक, एक सांस के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। तो नेताजी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए एक ही जोड़-तोड़ में लगे थे और इसका परिणाम भी देखने में मिला भाजपा 75 में से 67 सीटों पर पंचायत अध्यक्ष का काबीज करने पर सफल हुए।
दरअसल up की राजनीति यही कहता है सरकार जिसकी हो उसी के पंचायत अध्यक्ष सबसे ज्यादा चुने जाते हैं। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है अगर आप पिछले कई आंकड़ों पर नजर डालें तो योगी सरकार के पहले उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के सपा सत्ता पर काबिज था। और उस वक्त पंचायत चुनाव में अखिलेश ने 75 में से 64 बाजी मार ले गई थी। जबकि अखिलेश से पहले मायावती की बहुजन समाज पार्टी सत्ता में रहते हुए अपने 60 पंचायत अध्यक्ष बनाए थे। तो अब सवाल यह उठता है कि लखनऊ की सत्ता की चाभी इसी पंचायत चुनाव से निकलता है।
यही तो मौका था ताकत दिखाने का जितना कमल खिला यूपी में उतना संदेश गया कि सब कुछ ठीक-ठाक है। हालांकि लोकतंत्र का रेस जीतने का कोई आसान ट्रैक नहीं होता, क्योंकि यह टेढ़ी मेढ़ी गलियों से होकर जन भावना पर सवार हो जाती है। 2 मई को चुनाव के नतीजे आए थे। भारतीय जनता पार्टी से सपा को लोगों ने ज्यादा चाहा। तो अखिलेश प्रफुल्लित होने लगे और उनको लगा इस बार साइकिल खुद चलकर विधानसभा पहुंच जाएगी। और बीजेपी जब वोटों की गिनती में हार गई तो सहारा शाम धाम का
प्रधानमंत्री के छेत्र वाराणसी से 21 जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध।
दरअसल यहां पर संजोग देखीए तेरह दिन बाली केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी। और अटल बिहारी वाजपेई को सपा के चंद्रशेखर ने कहा था। सत्ता पाना कोई बड़ी बात नहीं मगर सिद्धांतों से सौदा नहीं होना चाहिए। और इसके बाद अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था जोड़-तोड़ वाली सत्ता को वह चिमटे से भी नहीं छूऐगें।
लेकिन इत्तेफाक और संजोग देखीए उत्तर प्रदेश में भाजपा की हिंदुत्व विरासत वाली भाजपा एक तरफ है। तो दूसरी तरफ पतली धारा में बहती चंद्रशेखर की सपा।

Join us on:

Leave a Comment