धरहरा में प्रसाद खाने से एक सौ लोग बीमार!

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:- रागिनी शर्मा !

छह बेड वाले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में ताला लटका रहने के कारण प्रभावितों ने गांव में ही ग्रामीण चिकित्सकों से कराया इलाज – शाम 6 बजे हुई घटना, रात 9 बजे 02 एम्बुलेंस लेकर पीएचसी प्रभारी डा. महेन्द्र व डा. एनके महतो पहुंचे प्रभावित गांव

  • धरहरा, मुंगेर : सोमवार को धरहरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित बंगलवा पंचायत अंतर्गत कोठवा गांव में प्रसाद खाने से एक सौ से ज्यादा लोग बीमार हो गए। प्रसाद खाने के कुछ ही देर बाद सभी को दस्त होने लगी। इसके बाद बीमार लोगांे को लेकर कुछ लोग 06 बेड वाले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे, जहां ताला लगा रहने के कारण ग्रामीण सभी बीमारों को वापस गांव लेकर आ गए। जहां ग्रामीण चिकित्सकों द्वारा सभी का इलाज शुरू किया गया। चूंकि बीमारांें की संख्या काफी अधिक थी, ऐसे में गांव की सड़क पर ही मरीजों को लिटा कर सूई व स्लाइन ग्रामीण चिकित्सकों द्वारा दिया गया। फूड प्वाइजनिंग के शिकार कई लोग इलाज कराने सीएचसी धरहरा एवं स्थानीय क्लिनिक में चले गए। फूड प्वाइजनिंग से कितने लोग बीमार हुए हैं, इसकी सटीक जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है। फूड प्वाइजनिंग की घटना गांव में शाम करीब 6 बजे हुई। ग्रामीणों ने पीएचसी प्रभारी को उसी समय इसकी सूचना दी। परंतु स्वास्थ्य विभाग की टीम रात लगभग 9 बजे प्रभावित गांव कोठवा पहुंची। इधर घटनास्थल पर थानाध्यक्ष नीरज कुमार ठाकुर दल बल के साथ पहुंचकर मामले की जानकारी लेते हुए अपने वरीय अधिकारियों को घटनास्थल की स्थिति से अवगत कराते रहे। ———- महेश कोड़ा के घर हुआ था सत्यनारायण भगवान का कथा फूड प्वाइजनिंग के शिकार रामलाल कोड़ा ने बताया कि कोठवा गांव निवासी महेश कोड़ा के घर सत्यनारायण भगवान का कथा संपन्न हुआ था। पूजा के पश्चात लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। जिस प्रसाद को ग्रहण करने की खातिर गांव के बच्चे, बूढ़े व महिलाएं पहुंचे थे। प्रसाद खाने के आधे घंटे बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और सभी को उल्टी होने लगी। उन्होने बताया कि प्रसाद खाने से उनकी पत्नी ननकी देवी, 7 वर्षीय पुत्र सुनील एवं 5 वर्षीय अनिल सहित एक सौ से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हुए हैं। ——– बंगलवा बाजार में प्राथमिक उपचार की दवाई भी हुई खत्म कोठवा गांव में इलाज के दौरान ग्रामीण चिकित्सक वीरेंद्र स्वर्णकार ने बताया कि उन्होंने लगभग 70 बच्चों को प्राथमिक उपचार दे दिया है। उनके पास एवं बंगलवा बाजार में प्राथमिक उपचार की दवाई भी खत्म हो चुकी है। ग्रामीण अशोक मिस्त्री बताते हैं कि जिस घर में पूजा थी उस घर में भी सारे लोगों ने प्रसाद का सेवन किया था। और अचानक सब की तबियत खराब हो गई। बंगलवा से धरहरा पीएचसी एवं मुंगेर सदर अस्पताल की दूरी अधिक होने और रात्रि में कोई साधन नहीं मिल रहा था। गांव में बच्चों एवं महिलाओं की स्थिति अचानक इतनी बिगड़ गई कि उचित इंतजाम नहीं होने के कारण आनन-फानन में ग्रामीण चिकित्सकों से हीं इलाज कराने की मजबूरी थी जिनके द्वारा सड़क पर ही इलाज करना शुरू कर दिया गया। ———- तीन घंटा बाद मेडिकल टीम के पहुंचने पर ग्रामीणों ने जताया रोष अचानक करीब एक सौ लोगों के फूड प्वाइजनिंग का शिकार होने के बाद गांव के लोगों ने इसकी जानकारी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ महेंद्र कुमार को दी। प्रभारी के द्वारा मरीजों को लाने के लिए एम्बूलेंस भेज दिया। लेकिन ना ताे खुद पहुंचे और ना ही मेडिकल टीम को भेजा। वरीय पदाधिकारियों के िनर्देश पर पीएचसी प्रभारी सहित एक अन्य डाक्टर व नर्स देर रात करीब 9 बजे कठवा गांव पहुंचे। सूचना के तीन घंटा बाद तक घटनास्थल पर मेडिकल टीम नहीं भेजे जाने से स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष देखा गया। कहते हैं सीएस सिविल सर्जन डा. हरेन्द्र कुमार आलोक ने बताया कि 02 एम्बुलेंस के साथ धरहरा पीएचसी प्रभारी डा. महेन्द्र एवं डा. एनके महतो को प्रभावित गांव भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम फूड प्वाइजनिंग के शिकार सभी लोगों का फाॅलोअप कर रही है।

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