ओर्केस्ट्रा के दौर में भी जीवित है परम्परा 1955 से नालंदा नाट्य कला परिषद करता आ रहा है नाटक का मंचन!

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रिपोर्ट – ऋषिकेश कुमार

: जहां एक और नालंदा जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर बार वालाओ का नाच कराने की प्रथा चल पड़ी है। वही दूसरी ओर नालंदा नाट्य संघ के कलाकारों के द्वारा सन 1955 ईसवी से लगातार प्राचीन परंपराओं को सहेजते हुए नाटक जैसे कार्यक्रमों को जिंदा रखे हुए हैं। आपको बता दे की हर साल नवरात्र के दौरान नवमी और दशमी को नालंदा नाट्य संघ के कलाकारों के द्वारा नाटक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसमें एक से बढ़कर एक नाटक का मंचन किया जाता है। इस बार भी नालंदा नाट्य संघ के कलाकारों के द्वारा भगवान शिव और कामदेव के कहानियों को नाटक के द्वारा दर्शकों को दिखाया गया की आखिर क्यों भगवान भोलेनाथ की तपस्या को कामदेव ने भंग किया था जिसके बाद भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया था। नालंदा नाट्य संघ के कलाकारों के द्वारा एक से बढ़कर एक सामाजिक थीम पर नाटक के माध्यम से समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास लगातार कई सालों से किया जा रहा है।

बाइट।संजू कुमार

ऋषिकेश संवाददाता नालंदा

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