रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय
आरा/दूर्गा पूजा के मध्य में पड़ने के बाउजूद वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय ने रविवार को अपना 32वा स्थापना दिवस धूमधाम से मना,कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रो शैलेंद्र चतुर्वेदी ने किया,जबकि मंच का संचालन कुलसचिव डॉ रणविजय ने, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छपरा विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ दुर्गविजय सिंह, तो मुख्य अतिथि बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षा संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ कन्हैया बहादुर सिंह थे,कार्यक्रम के शुरू में विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित वीर कुंअर सिंह के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया, तो कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि समेत गढ़मान्य लोगों ने दीप प्रज्वलित कर किया, वीर कुँअर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर प्रोफेसर शैलेंद्र चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि सह छपरा के पूर्व कुलपति डॉ दुर्गविजय सिंह सहित सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया, इस दौरान हुए कार्यक्रम में कुलसचिव डॉक्टर रणविजय कुमार ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों व गतिविधियों के बारे में बताया,उसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सह छपरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ दुर्गविजय सिंह ने कहाँ की परिसर में स्थापना दिवस मनाया जा रहा है, काफी हर्ष हो रही है, उन्होंने कहाँ की हमारा कर्म स्थल भी रहा है,जब 1992 में मगध विश्विद्यालय से कटकर वीर कुंअर सिंह विश्वविद्यालय बना था, और 1993 में 23 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह जो उत्सव मनाया जा रहा था तब इस परिसर से लेकर सभी कॉलेजों में पैर रखने की जगह नहीं थी लेकिन आज स्थापना दिवस जो मन रहा है,उसके अनुकूल से कहीं ज्यादा कम लोगों के आने से निराशा झलकी, उन्होंने कहाँ की लगता है, नवरात्र की वजह से लोगों की कम भीड़ है,वहीं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉक्टर कन्हैया बहादुर सिन्हा ने कहाँ की बिहार सरकार के अधिकारी चाहते हैं कि डंडे के सहारे विश्वविद्यालय को चला ले, ये कतई नहीं हो सकता, उच्च शिक्षा के लिए सरकार को राजभवन से तालमेल कर चलाई जा सकती है, उन्होंने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि चीनी मिट्टी के बर्तनों के दुकान में जिस प्रकार तोड़फोड़ करता है, उसी प्रकार शिक्षा विभाग में दखल देने जैसा तोड़फोड़ करना सही नहीं है,वहीं अध्यक्षचिय भाषण के दौरान कुलपति डॉ प्रो शैलेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि मुझे वही करना चाहिए था जो निर्वहन के योग्य था,
गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज नोहटा के बारे में कुलपति महोदय ने कहा कि वहां सन 1919 से 22 तक का रिजल्ट मैं दे दिया जिसमें कितने बच्चे फर्स्ट डिवीजन है, इसका मतलब यह हुआ कि वहां टीचर की जरूरत नहीं है, उन्होंने कहा कि हमें अर्थात टीचरों को अपने अंदर विकास की अर्थ, विकास की सोच विकसित करनी होगी,
उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के लिए किए गए प्रयास हेतु छात्र सगठनो की प्रशंसा की, उन्होंने कहा कि छात्र तथा छात्र नेता,जो की विभिन्न विभिन्न संगठनों यथा आईसा जनता दल, राजद, एबीवीपी आदि संगठनों से जुड़े रहे वह एक मंच पर आए और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की लिए संघर्ष किया,
कुलपति महोदय ने सत्य निष्ठा, ईमानदारी की वकालत करते हुए कहा कि हम शिक्षकों को कुछ नया देना होगा, कुछ नई चीज करनी होगी तब जाकर समाज में तथा छात्रों के बीच एक व्यापक स्तर पर शिक्षा की प्रासंगिकता स्पष्ट हो पाएगी।
उन्होंने अनेक ऐसे उदाहरण दिए जिससे शिक्षा की तथा शिक्षकों की दशा और दिशा बदल सकती है,
कुलपति महोदय ने कक्षाओं के संबंध में कहा कि जब बच्चा गूगल प्लेटफार्म से पढ़ लेगा तो फिर वह क्लास में क्यों आएगा अतः शिक्षकों को जरूरत है कुछ नया देने की बच्चों को क्लास में कुछ नहीं चीज समझने की तब वह बच्चा क्लास में आसानी से आने लगेगा ना की ऊपर से दबाव बनाने से,
यह उनकी सादगी, मृदुभाषी व उच्च आदर्श का प्रमाण ही है कि उन्होंने शिक्षकों, छात्र-छात्राओं तथा शहर के गणमान्य लोगों को यह आसान्वित किया ,कि भविष्य में, जब तक उनका कार्यकाल है तब तक वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय का नाम आदर्श के साथ विश्वविद्यालय सेवा आयोग की गलियारों में भी लिया जाएगा,वहीं विश्विद्यालय के प्रतिकूलपति डॉक्टर आशीष चौधरी ने कहा कि वीर कुंअर सिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति ऊर्जावान है, उन्होंने विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में दिनरात काम करते हैं, वे बेपटरी चल रहे सेशन को पटरी पर लाने के काम किया है,कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनुज रजक ने किया,इस कार्यक्रम के मौके पर महाराजा कॉलेज के पूर्व प्रिंसीपल डॉ गांधी जी रॉय, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ अनवर आलम,डॉ लतिका वर्मा, प्रो पालित, डॉ कुंदन सिंह, डॉ शशि सिंह, सीनेट सदस्य संतोष तिवारी, सीनेट सदस्य के डी यादव, पूर्व सीनेट सदस्य अजय कुमार तिवारी मुनमुन, छोटू सिंह, सब्बीर, आदि लोगों की उपस्थिति रही




