रिपोर्ट – अमित कुमार
बिहार सरकार द्वारा कोविड के पहले से स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवारत नर्स और एएनएम जैसी महिला कर्मचारियों द्वारा पूर्ण रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने के लिए प्रदेश के 38 जिलों के हर गांव प्रखंड स्तर तक केंद्र सरकार की मदद से स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की हर संभव प्रयास किएये गए हैं जो जमीनी स्तर पर कई वर्षों बाद भी आज नजर आ रहा है। लेकिन इसी बीच प्रदेश सरकार के वरिष्ठ कर्मचारियों के द्वारा इन नर्सेज एवं अन्य महिला कर्मचारियों के प्रति दोहरे रवैया को अपनाते हुए करीब 5 से 6 महीने अंतराल के बाद हर बार उन्हें आर्थिक अत्याचार के रूप में प्रताड़ित किया जा रहा है ।इसके खिलाफ कल यही सेवारत नर्सेज एवं एएनएम महिला कर्मचारियों ने पटना सहित जिले के कई प्रमुख प्रखंड स्तर के केंद्रों पर सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के द्वारा किए जा रहे दोहरे मापदंड को लेकर के विरोध प्रदर्शन किया ।

जिसमें उन्होंने प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा विशेष तौर पर चीफ सेक्रेटरी के कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए यहां आरोप लगाया कि दो केटेगरी के सामान्य कर्मचारियों के प्रति अलग-अलग रवैया अपनाने के कारण आज 2210 के कर्मचारियों को हर महीने पेमेंट दिया जाता है जबकि वही बस 2211 के दूसरी महिला कर्मचारियों को 6/7 महीने तक पेमेंट नहीं दिया जाता है जिसको लेकर के उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि अगर सरकार हमारे साथ इसी तरीके से भेदभाव करेगी तो हम निश्चित तौर पर अपने इस प्रदर्शन को आंदोलन के रूप में प्रदर्शित कर बिहार सरकार के धूल मित्रवर को जनता के सामने उजागर करेंगे ।
बाइट…. उषा कुमारी सीएचएस फुलवारी शरीफ
मालूम हो की यह महिला कर्मचारी जिन्होंने अपना सर्वत्र सेवा के रूप में प्रदान कर आज अपनी मेहनताने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैला कर दर्द से सहायता की मांग कर रही हैं। अगर जो सरकार थोड़ी भी गंभीर होकर इन महिलाओं की मांगों पर विचार करें तो निश्चित तौर पर नारी शक्ति अपने प्रभाव से समस्त समाज की रक्षा करने में सक्षम है




