आरा/आशुतोष पाण्डेय
आरा के एमएम महिला कॉलेज में शुल्क वसूली को लेकर छात्राओं में आक्रोश, कॉलेज प्रशासन के रवैये पर उठ रहे सवाल
आरा। कुलाधिपति के आदेश के बावजूद वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय, आरा में छात्राओं से नामांकन शुल्क लिए जाने का मामला सामने आने के बाद छात्राओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। छात्राओं का आरोप है कि जब उच्च स्तर से छात्राओं को नामांकन शुल्क में राहत देने का आदेश दिया गया है, तो फिर कॉलेज स्तर पर शुल्क की मांग क्यों की जा रही है।
नामांकन कराने पहुंच रही छात्राओं के बीच इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय एवं राजभवन स्तर से जारी निर्देशों का पालन सभी संबद्ध महाविद्यालयों में समान रूप से होना चाहिए। ऐसे में यदि किसी कॉलेज में आदेश के विपरीत शुल्क की वसूली की जा रही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए और छात्राओं से ली गई राशि का स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मामले को लेकर छात्राओं में इस कदर नाराजगी है कि कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। छात्राओं का कहना है कि नामांकन के समय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली छात्राओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि सरकार अथवा कुलाधिपति स्तर से शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया है, तो उसका लाभ छात्राओं को मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के स्नातक नामांकन की प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित करने की तैयारी की गई थी। विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में नामांकन और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया को लेकर पहले से ही दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।
वहीं, एमएम महिला कॉलेज की ऑनलाइन व्यवस्था में भी विभिन्न सेमेस्टर के लिए एडमिशन फीस भुगतान के विकल्प उपलब्ध हैं।
आदेश और वसूली में अंतर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कुलाधिपति का आदेश छात्राओं से नामांकन शुल्क नहीं लेने अथवा शुल्क में छूट से संबंधित है, तो कॉलेज प्रशासन द्वारा किस आदेश के आधार पर छात्राओं से राशि ली जा रही है? क्या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कॉलेज को कोई अलग दिशा-निर्देश प्राप्त हुआ है? यदि हां, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
छात्राओं और अभिभावकों की मांग है कि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे मामले में तत्काल संज्ञान ले और स्पष्ट करे कि छात्राओं से किस मद में कितनी राशि ली जानी है। साथ ही यदि नियमों के विपरीत राशि की वसूली हुई है, तो उसे वापस कराने की दिशा में भी कार्रवाई की जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी नजर
मामले में अब निगाहें वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं। कुलाधिपति के निर्देशों के अनुपालन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय एवं संबंधित महाविद्यालयों की होती है। बिहार के राजभवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कुलाधिपति को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक हित में निर्देश जारी करने की शक्ति है और संबंधित विश्वविद्यालयीय निकायों को उनका अनुपालन करना होता है।
ऐसे में यदि आरा के महिला कॉलेज में वास्तव में कुलाधिपति के आदेश के विपरीत नामांकन शुल्क लिया जा रहा है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
हालांकि, कॉलेज प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण अथवा शुल्क लेने का आधार सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।



