बेगूसराय- मात्र 6 महीने चलने वाले इस स्कुल की खासियत जानकर रह जायेंगे दंग!

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प्रशान्त कुमार की रिपोर्ट

बिहार में आमतौर पर सरकारी स्कूल भवनहीन और स्कूल में शिक्षक की उपस्थिति नहीं होती है और सही से पठन-पाठन सुचारू रूप से नहीं किया जाता है। आपको प्राथमिक विद्यालय के नाम सुनते ही आपके जेहन में ऐसी तस्वीर सामने आती है जिसमें पढ़ाई के नाम पर शिक्षकों की अनुपस्थिति, छात्रों की घटती संख्या , खासकर वर्ग रूम की कमी की छवि उभरती है, लेकिन अब ऐसा भी नहीं है। बिहार के बेगूसराय में एक ऐसा भी विद्यालय है जहां शिक्षा व्यवस्था को देखकर यह कहा जा सकता है कि सरकार का जो सपना है सब पढ़े सब बढ़े साकार हो रहा है .समय के साथ ही स्थितियां सुधरी ही नहीं, बल्कि कायाकल्प सा हुआ है . शिक्षकों की कार्य के प्रति लगन, समर्पण, बच्चों के प्रति स्नेह की भावना तथा कुछ नया कर दिखाने की जिजीविषा भी बढ़ी है और गंगा का जलस्तर तय करता है स्कूल कितने महिनें खुले रहेंगे

बेगूसराय जिला मुख्यालय से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर बछवारा प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय बिशनपुर रानीटोल एक गंगा के कटाव वाले दियारा इलाके में अवस्थित है . इस स्कूल जाने के लिए सिर्फ बाइक ही सहारा होता है . विद्यालय के शिक्षक रविशंकर कुमार और दशरथ चौधरी ने बताया यहां खेत खलिहान से होकर इस साल 6 महीने आने होते हैं गंगा के जलस्तर और बरसात के दिनों में आने में काफी परेशानी होती है कई बार गिर भी जाते हैं वहीं भौगोलिक दृष्टिकोण से यह विद्यालय साल के 6 महीने ही खुलते हैं क्योंकि गंगा के जलस्तर बढ़ने के बाद विद्यालय में पानी आ जाती है .
मात्र 1100 ग्राम चावल में बच्चों का बनता है मिड डे मील

विद्यालय के शिक्षक रवि शंकर कुमार ने बताया इस विद्यालय के वर्ग प्रथम में तीन , दूसरे में दो , तीसरे में दो , चौथे में एक और पंचम में 3 बच्चों का नामांकन है . जिस को पढ़ाने के लिए 2 शिक्षक यहां नियुक्त होने के साथ साथ 8 वर्ग कमरे बनाया गया . इसके अलावे किचन के लिए अलग से कमरे हैं . यहां पर मात्र 11000 ग्राम चावल में ही मिड डे मील दो रसोइया तैयार करते हैं .
स्थानीय उपेंद्र यादव , शांतिदेवी ने बताया शिक्षा समय से आते हैं और समय से बच्चों को पढ़ाते जाते हैं शिक्षक काफी मेहनती है . वही इस विद्यालय के पोषक पोषक क्षेत्र फिलहाल पांच घर ही हैं .

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