प्रियांशु कुमार समस्तीपुर
पन्ना ,पवई:-विश्व मृदा दिवस के अवसर पर ग्राम सिमरिया (गुलावसिंह )में किया गया पौधारोपण और विश्व मृदा दिवस के पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतानंद पाठक ने कहा कि
विश्व मृदा दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा हर वर्ष 5 दिसंबर को मनाया जाता है। दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 68वीं सामान्य सभा की बैठक में पारित संकल्प के द्वारा 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाने का संकल्प लिया गया था। मृदा जिसे हम आम बोलचाल की भाषा मे मिट्टी कहते हैं, हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है। मिट्टी के महत्व को याद रखने और उसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के तहत संचालित अंतरराष्ट्रीय संगठन आज के दिन मृदा दिवस मनाते हैं। इसका उद्देश्य लोगों का ध्यान मृदा संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन की ओर लाना है। मिट्टी के क्षरण के बारे में जागरूक करना है, जोकि एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है, जिसे मिट्टी की स्थिति में गिरावट के रूप में जाना जाता है। उद्योगों द्वारा पर्यावरण मानकों के प्रति लापरवाही और कृषि भूमि के कुप्रबंधन से मिट्टी की स्थिति खराब होती है।
विश्व मृदा दिवस का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, कृषि के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के शमन, गरीबी उन्मूलन और सतत विकास के लिए मिट्टी के महत्व के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है। मिट्टी के लिए जश्न मनाने की विश्व स्तर पर शुरुआत इसी महीने यानी दिसंबर 2013 से हुई। हालांकि इस दिन को मनाने की सिफारिश साल 2002 से ही शुरू हो गई थी। जब अंतरराष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ ने पहली बार 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाने की सिफारिश की। बाद में सर्वसम्मति से 2013 में इस दिन को आधिकारिक तौर पर मनाए जाने की घोषणा कर दी गई। एक साल बाद 5 दिसंबर 2014 को पहली बार पूरे विश्व में मृदा दिवस मनाया गया। आज के इस कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री नितेश पटेल सिमरिया गुलाब सिंह सरपंच प्रतिनिधि एवं राकेश वनरक्षक, मुलायम सिंह पूर्व उपसरपंच रामकृष्ण पाठक एवं सैकड़ों लोग शामिल रहे!




