जाफरगंज – अंबेडकर नगर में गरीबों को घर ढाहने के नोटिस के खिलाफ भाकपा-माले- सीपीआई का धरना।

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पंकज कुमार जहानाबाद।

जाफरगंज – अंबेडकर नगर में गरीबों को घर ढाहने के नोटिस के खिलाफ भाकपा-माले- सीपीआई का धरना।
गरीबों – दलितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मानसिकता के खिलाफ होगी आर -पार की लडाई- भाकपा-माले जहानाबाद शहर के जाफरगंज झोपड़ी पट्टी, अंबेडकरनगर समेत विभिन्न मुहल्लों में पीढ़ी दर पीढ़ी से घर बनाकर बसे गरीबो - दलितों, अल्पसंख्यकों को शीघ्र घर खाली करने का नोटिस के खिलाफ जिला अधिकारी के समक्ष भाकपा माले और सीपीआई नगर कमेटी के आह्वान पर धरना दिया गया। धरना के माध्यम से गरीबों पर अतिक्रमण के नोटिस पर सख्ती से रोक लगाने,सरकारी जमीन पर बसे गरीबों का सर्वे कराने, पर्चा एवं पक्का मकान देने, सभी भूमिहीन शहरी परिवारों के लिए जमीन अथवा आवासीय कॉलोनी बनाकर देने, शौचालय के बकाया किस्त की भुगतान करने, शराब के नाम पर अनावश्यक धरपकड़ व अवैध वसूली पर रोक लगाने नाली - गली का पक्की करण, फुटपाथ दुकानदारों के लिए स्थाई दुकान एवं रोजगार हेतु आर्थिक अनुदान देने, आदि मांगों का स्मार पत्र सौंपा। धरना की अध्यक्षता कामरेड कामरेड मुकेश पासवान ने किया। कारगिल चौक पर सभा को माले जिला सचिव कामरेड श्रीनिवास शर्मा, माले नेता कामरेड वसी अहमद, कामरेड गरीबन दास, आरिफ मासूमी संयोजक इंसाफ मंच, कामरेड अंबिका प्रसाद सिंह, कामरेड सुरेश प्रसाद जिला सचिव सीपीआई, हसनैन अंसारी, कामरेड प्रदीप कुमार,कामरेड रफीक आलम, सुल्ताना खातून कामरेड विजय कुमार सिन्हा, कामरेड मुमताज आलम, कामरेड अनिल कुमार, मोहम्मद मुस्तफा कामरेड, रंधीर पासवान ,मोहम्मद बरातु आदि ने संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि सरकार बदल गई है परंतु प्रशासन का रवैया नहीं बदला है। अधिकारी गरीबों - दलितों पर बुलडोजर चलाने को उतारू है। प्रशासन का रवैया पूरी तरह जनविरोधी, गरीब विरोधी बना हुआ है। सरकारी जमीन पर गरीबों का स्वभाविक हक है। झोपड़ी पट्टी और गंदी बस्तियों में रहना गरीबों की मजबूरी है। आजादी का अमृत काल मनाया जा रहा है और दलितों, गरीबों को अभी तक सिर पर छत नसीब नहीं है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करता है। यह शर्मनाक है कि अफसरों और मंत्री, सांसद, विधायक के लिए आलीशान महल, क्वाटर बन गया है। शहर को स्मार्ट बनाने का शोर मचाया जाता है परंतु गरीब - गुरबे, मजदूर और आम शहरी नागरिक न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। नेताओं ने आगे कहा कि महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है। आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। गरीब, छोटे-मझोले परिवार बैंक से लेकर बड़े पैमाने पर महाजनी कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। सूदखोरों के उत्पीड़न से कईयों की जान चली जा रही है। पुलिस दमन और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, लूट- खसोट से चौतरफा तंगोतबाही का आलम बना हुआ है। मोदी - शाह के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से सामाजिक वातावरण विषैला बना हुआ है। देश रसातल में जा रहा है। गाजर मूली से भी बदतर भाव में सरकारी संस्थानों, कंपनियो, सेवा क्षेत्रों को मोदी सरकार नीलाम कर रही है। देशवासियों से विश्वासघात हो रहा है। देश बचाने के लिए मजदूर, किसान, बुद्धिजीवियों, युवाओं समेत सभी देशभक्त नागरिकों को एकजुट होने का आह्वान भी किया।

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