रिपोर्ट – अनमोल कुमार
भाजपा प्रत्याशी के पति ललन सिंह
गोतिया भाई हैं सूरजभान के
ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी व पूर्व सांसद वीणा देवी ने खुद को मोकामा की बहू बताकर वोट मांग रही
महागठबंधन की अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को मिल रही कड़ी चुनौती मोकामा का मुकाबला अब काफी दिलचस्प हो गया है, अब यहां की लड़ाई दो बाहुबलियों अनंत सिंह बनाम सूरजभान सिंह का हो गया है। सूरजभान सिंह लगातार यह दावा कर रहे हैं कि इस बार मोकामा की जनता कमल का साथ देगी। बता दें कि वे भाजपा उम्मीदवार सोनम सिंह के पति ललन सिंह सूरज भान सिंह के गोतिया भाई और एक समय अंडरवर्ल्ड मैं सूरज भान के दाहिने हाथ भी थे । परंतु वर्तमान में विगत कई वर्षों से नलिनी रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मोकामा के अधिकांश जनता के दिल में अपना जगह बना लिए हैं लोगों के दुख दर्द में शामिल होना और उनकी समस्याओं से रूबरू होना आदि महत्वपूर्ण गतिविधियां रही है । बता दें कि मोकामा में महागठबंधन (राजद) ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को मैदान में उतारा है तो भाजपा ने अनंत सिंह के पुराने प्रतिद्वंदी ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को सामने कर दिया है। सूरजभान सिंह की पत्नी और पूर्व सांसद वीणा देवी ने खुद को मोकामा की बहू बताकर मतदाताओं से सोनम देवी के लिए वोट मांग रही हैं। वे सोनम को अपनी देवरानी बताकर चुनाव प्रचार में जुटी हैं। बाहुबली सूरजभान सिंह ने कहा है कि यह उप चुनाव तय करेगा कि मोकामा और गोपालगंज की जनता विकास चाहती है या नहीं? यह भी तय करेगा की देश में अमन चैन और विकास चाहने वाले लोगों का समर्थन प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ है। इसलिए मोकामा और गोपालगंज दोनों सीटों पर कमल का खिलना तय है। सूरजभान सिंह मोकामा के विधायक रह चुके हैं। इसके पहले वर्ष 2000 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को चुनावी अखाड़े में धूल चटा चुके हैं। गौरतलब है कि मोकामा में दो बाहुबलियों अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी चुनावी मैदान में हैं। दोनों तरफ से शक्ति प्रदर्शन भी जारी है। अनंत सिंह जेल में हैं, इसलिए उनके समर्थकों ने मोकामा में मोर्चा संभाल रखा है। दूसरी ओर एनडीए उम्मीदवार सोनम देवी के पक्ष में सूरजभान सिंह ने मोकामा के मैदान में उतर चुके है। अब यहां का मुकाबला एनडीए और महागठबंधन से है जो दो बाहुबलियों के बीच हो गया है। विगत 17 वर्षों से अनन्त सिंह का मोकामा विधानसभा में दबदबा रहा है।
जातीय समीकरण के अनुसार भूमिहार का 40% यादव मुस्लिम कुर्मी का 100 फ़ीसदी मत महागठबंधन के पक्ष में है जबकि 60 प्रतिशत भूमिहार मत पासवान चंद्रवंशी एवं अन्य पिछड़ा दलित वर्ग मत एनडीए के पक्ष में है । विडंबना यह है कि भूमिहार का मतदान अधिकतम 60 से 65% ही हो पाता है जबकि पिछला और दलित का मतदान 80 से 85% होता है अब देखना यह है कि इन बातों को कौन अपने झोली में अधिक से अधिक समेट पाता है।




