कोर्ट के जरिए अति पिछड़ों के आरक्षण समाप्त करने की भाजपाई साजिश का विरोध करें-महानंद।

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पंकज कुमार जहानाबाद।

प्रतिवाद सभा को सम्बोधित करते हुए माले विधायक महानन्द सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट के जरिए अचानक अंतिम चरण में पहुंचा चुनाव को स्थगित करवाया जाना कहीं से उचित नहीं है । 2007, 2012 एवं 2017 में नगर विकास मंत्रालय भाजपा के पास ही था । उनके कार्यकाल तक कोई कोर्ट अथवा किसी तरह का अड़ंगा नहीं लगा । जैसे ही भाजपा, सरकार से अलग हुई तो बिहार में एक से एक अड़ंगा लगाकर आम जनों को परेशान करने में लगी हुई है ।
उन्होंने कहा कि सामाजिक स्तर एवं आर्थिक रूप से पिछड़े जातियों को नगर निकाय एवं पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है । उसी आरक्षण के आधार पर 2007 में पहली दफा चुनाव संपन्न हुआ । उस समय नगर विकास मंत्रालय बीजेपी के पास ही था। लेकिन किसी तरह का कोई अड़ंगा नहीं लगाया गया । तब से तीन बार नगर निकाय में आरक्षण के साथ चुनाव संपन्न हुआ है । लेकिन किन्हीं लोगों का कोई आपत्ति नहीं हुआ ।लेकिन जैसे ही इस बार सरकार से बीजेपी अलग हटी, तो कोर्ट के जरिए आरक्षण पर रोक लगाया गया है और चुनाव आयोग को निर्देश देकर पूरे चुनाव को ही रद्द कर दिया गया ।
विदित हो कि कोर्ट ने महज अति पिछड़ों के आरक्षण वाले सीट को रद्द कर अनारक्षित(सामान्य कोटा ) करते हुए चुनाव कराने का फैसला सुनाया था । जबकि चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के उस फैसले के इतर अपने स्तर से पूरे चुनाव को ही रद्द कर दिया। यह लोकतंत्र के खिलाफ है और आम जनता के निचले स्तर पर लोकतांत्रिक निकायों के जरिए प्रतिनिधि चयन होने की प्रक्रिया पर ग्रहण लगाना है ।
जिस तीन टेस्ट का हवाला दिया जा रहा है यह कहीं से भी उचित नहीं है । क्योंकि बिहार में यह बखूबी लागू था और सर्वमान्य रूप से चल रहा था । किसी न किसी रूप में तंग तबाह करना है, जनता के पैसे को दुरुपयोग करना है, बर्बाद करना है, यह मंशा हमेशा भाजपा की रही है । आम जनता को तबाह करने के साथ-साथ सरकारी पैसे की भी बर्बादी करवाने में भाजपा अपनी भूमिका निभा रही है ।
भाजपा की इस चाल को समझना होगा । उल्टे चोर बोले जोर से वाली कहावत चरितार्थ करने में लगी हुई है । उसके साजिश को समझना होगा ।
जहां जन समर्थन भाजपा के पक्ष में नहीं है, वहां कोर्ट, ईडी, सीबीआई एवं इनकम टैक्स के जरिए अपने विरोधी व बहुमत की सरकार को तंग- तबाह करने में लगी हुई रहती है ।
उन्होंने कहा कि जब से भाजपा सरकार आई है कोर्ट को भी पंगु बना के रख दिया है । सीबीआई की तरह ही स्वायत्त संस्था के रूप में पहचान अब समाप्त करते जा रही है । कोर्ट को भी सरकार की मनमर्जी पर चलाने की भाजपा की साजिश सफलीभूत होते जा रहे हैं । इसका प्रतिकार और भंडाफोड़ करना जरूरी है । सरकार के द्वारा गलत कदम उठाए जाने के खिलाफ कोर्ट की हिम्मत नहीं हो पाती है कि कोई न्यायसम्मत फैसला सुनाया जाए । अल्ट न्यूज के संपादक मोहम्मद जुबेर, बिलकिस बानो के बलात्कारियों को माफी का मामला हो, राफेल घोटाला जांच करवाने का मामला हो, भाजपा के खिलाफ एक कदम नहीं उठा सकते । इसलिए सीबीआई की तरह ही कोर्ट को भी भाजपा अपने 8 सालों के कार्यकाल में बनाते चली जा रही है ।
जनता के जनवादी अधिकारों की रक्षा करने का काम जहां कोर्ट करते रहे हैं । संवैधानिक अधिकारों पर जब भी सरकार के द्वारा अतिक्रमण हुआ है, कोर्ट जनता के पक्ष में खड़ा होकर सरकार को पीछे हटने के लिए बाध्य करते रहे हैं ।
प्रतिरोध सभा को माले के जिला सचिव जितेंद्र यादव, रविंद्र यादव, उपेंद्र पासवान, रामकुमार सिन्हा समेत कई नेताओं ने संबोधित किया । जबकि प्रतिरोध मार्च भाकपा माले कार्यालय से निकला जो अरवल जी ए हाई स्कूल के बाद भगत सिंह चौक होते हुए ब्लाक परिसर पहुंचा, जहां प्रतिवाद सभा में तब्दील हो गई । इस मार्च में भाकपा माले विधायक, जिला सचिव के अलावे राम कुमार सिन्हा, शोएब आलम, मिथिलेश यादव समेत भारी संख्या में नेता/कार्यकर्ता शामिल हुए ।

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