मनोज कुमार :-
कृषक वैज्ञानिक वार्तालाप कार्यक्रम हुआ आयोजित
कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधक अभिकरण (आत्मा),
गया द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर गया में दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्तालाप कार्यक्रम का शुभारम्भ डा॰ राजीव सिंह, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर गया द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। गया जिला में इस खरीफ मौसम में अल्पवृष्टि के कारण धान और अन्य खरीफ फसलों का आच्छादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में गया जिला के किसानों को वर्तमान परिस्थिति में खेतों में लगी फसल को सुरक्षित रखने एवं आने वाले मौसम में फसल को वैज्ञानिक तरीके से लगाने के उद्देष्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखण्डों से आत्मा अन्तर्गत गठित प्रखण्ड किसान सलाहकार समिति के अक्ष्यक्ष अथवा उनके प्रतिनिधि प्रगतिषील किसान भाग ले रहे हैं।

अपने संबोधन में डा॰ राजीव सिंह ने कहा कि जिले में इस वर्ष धान लगाने के मुख्य समय जून में 66 प्रतिषत कम और जुलाई में 61 प्रतिषत कम बारिष हुई है जबकि जून से अभी तक जिले में 44 प्रषित कम बारिष दर्ज की गई है। जिससे जिले में धान की रोपनी मात्र 1 लाख 11 हजार सत्ताईस हेक्टेयर में ही हो पायी है। इसमें भी अधिकतर रोपाई का कार्य अगस्त माह में होने के कारण उपज के बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है। उन्होने कहा कि धान की खेत में पानी भरकर रखना जरुरी नहीं है, केवल जीवन रक्षक सिंचाई, नमी बनाकर रखने और खेत में दरार नहीं पड़ने देने से ही धान की अच्छी उपज मिल सकती है। धान में सिंचाई करनी हो तो संध्या के समय करना चाहिये। इस समय फसल में धड़ छेदक कीट का प्रभाव देखा जाता है, यदि खेतों के ऊपर ड्रैगन फ्लाई ज्यादा दिखाई दे रहे हो ंतो समझना चाहिये की फसल में धड़ छेदक का प्रकोप बन रहा है, यद्यपि ड्रैगन फ्लाई किसानों का मित्र कीट है यह धड़ छेदक के संभावित प्रकोप की ओर ईषारा भी करती है। किसानों को सावधानी से खेत का निरीक्षण करते हुये धड़ छेदक से नियंत्रण के जैविक एवं रासायनिक उपाय अपनाने की जानकारी दिया। उन्होने परती रह गये ऊपरी एवं मध्यम भूमि में मक्का की खेती करने का सुझाव दिया। उन्होने बताया कि एक एकड़ में पंक्ती में मक्का लगाने पर 24 हजार पौधे लगते हैं। हर पौधे मे कम से एक मक्का जरुर लगता है। किसानों के खेत से मक्का आसानी से 02 से 03 रुपये प्रति पीस की दर से बिक जाता है। इस प्रकार 72 हजार रुपये तक कुल आय एवं 60 हजार रुपये तक प्रति एकड़ शुद्ध आय कमाई जा सकती है। इसके साथ ही परती जमीन में तोरिया एवं कुल्थी की खेती की जानकारी दिया। रबी मौसम में समय से चना एवं मसूर की खेती कर अधिक लाभ कमाने के बारे में भी बताया।
कृषि विज्ञान केन्द्र, आमस के वैज्ञानिक डा॰ एस॰ के॰ चैधरी ने उनके केन्द्र से बीज वितरण की जानकारी दिया। मानपुर के वैज्ञानिक डा॰ अषोक कुमार ने प्राकृतिक खेती की जानकारी दिया। किसानोें ने मिर्चा के सुखरा रोग के नियंत्रण, बैगन के फल छेदक एवं भंगुरी रोग के जैविक नियंत्रण के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम कल दिनांक 03.08.2022 को सम्पन्न होगा। आत्मा गया की ओर से उप परियोजना निदेषक, आत्मा गया नीरज कुमार वर्मा उपस्थित रहे। इसके अलावा मानपुर प्रखण्ड के कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, सहायक तकनीकी प्रबंधकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।




