ना हो कमीज तो घुटने से पेट ढक लेंगे, कितने मुनासिब है ये जिंदगी के सफर के लिए।

SHARE:

कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर:-

(हम बोलेगा तो कहेगा कि बोलता है।)

बिहार में सरकार बदली कोई 10 लाख नौकरी का वादा करता है तो कोई इससे डबल 20 लाख नौकरी का वादा। नौकरी का दावा करने वाली सरकार का जो आज क्रूर चेहरा सामने आया निश्चित ही आत्मा को दुखी करने वाली थी। शिक्षक अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। अधिकारियों की ‌खुलेआम अफसरशाही दिखा साहब कि जब तक मर्जी रहा शिक्षकअभ्यर्थी को पीटते रहे। यानी सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अपना अधिकार नहीं मांग सकते। सबसे बड़ा विचारणीय प्रश्न है आखिर इन्हें डंडा चलाने की हिम्मत कहां से आई। काहे का जनतंत्र हुजूर जहां तंत्र तांडव कर रहा है और जन सबसे निचले पायदान पर है। साहिब ने मीडिया कर्मियों को भी नहीं बख्शा, हालांकि शिक्षक अभ्यर्थी लगातार झंडे की आड़ में बचने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन साहब ने तिरंगा का भी लिहाज नहीं किया और तीन चार लाठी तान दिया। हालांकि बाद में प्रशासनिक महकमा ने मामले को तूल पकड़ते देखा। तो तिरंगे के अपमान को जांच आदेश में तुरंत दे दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर जब रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं। तो सरकार हम जनमानस की सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकता है।

Join us on:

Leave a Comment