किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए एनीमिया साबित हो सकता है घातक

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):-

सही पोषण से सुरक्षित होगा किशोरियों का बेहतर स्वास्थ्य

कैमूर. किशोरावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें 10 से 19 वर्ष के किशोर और किशोरियों में शारीरिक, मानसिक व हार्मोनल विकास बहुत तेजी से होता है। किशोरियों में माहवारी की शुरुआत होती है। उचित पोषण और जानकारी के अभाव में किशोरियों में एनीमिया की संभावना बढ़ जाती है, जो उनके बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य में सुखद एवं स्वस्थ मातृत्व के लिए बाधक साबित हो सकती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2022 तक एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत देश की लगभग 68 करोड़ किशोरियों में एनीमिया से मुक्ति का लक्ष्य रखा है।
एनीमिया रोकथाम के लिए जिला स्तरीय योजनाएं और कार्यक्रम

  1. साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम- इसके तहत सभी स्कूलों में 10 से 19 साल तक के किशोर एवं किशोरियों तथा विद्यालय नहीं जाने वाले किशोरियों को भी आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों के सहयोग से हर बुधवार को आयरन फोलिक एसिड की एक-एक गोली दी जा रही है। इस तरह साल में उन्हें कुल 52 गोली खिलाई जाती है।
  2. राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान- कृमि के कारण भी किशोरों में खून की कमी होती है। इसलिए इस कार्यक्रम के अंतर्गत किशोरों को साल में दो बार अल्बेण्डाजोल की गोली खिलाने का प्रावधान है।
  3. इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा चलाये जा रहे किशोर/ किशोरी स्वास्थ्य परामर्श केन्द्रों में किशोरियों को शारीरिक और प्रजनन स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी दी जाती है।
    किशोरियों में रक्त की कमी से होने वाले दुष्प्रभाव
    सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास में बाधा
    रोग प्रतिरोध क्षमता में कमी के कारण संक्रमण फैलने का अधिक ख़तरा
    मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी
    प्रसव के दौरान स्वास्थ्य जटिलताओं में वृद्धि
    एनीमिया से बचाव के उपाय
    ताजे फल विशेष करके खट्टे फल जिनमें विटामि‍न- सी की मात्रा होती है को अपने आहार में शामिल करें। यह . विटामि‍न- सी शरीर में आयरन सोखने में और एनीमिया को दूर करने में सहायक है ।
    भोजन में चुकंदर, गाजर, ट्माटर और हरी पत्तेदार सब्जियां, मक्का, भुना चना, गुड़, दाल, सोयाबीन, मटर, सूखे मेवे, मांस-मछली, अंडा इत्यादि शामिल करें।
    सब्जी को लोहे की कढ़ाई में बनाएं। इससे खाने में आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
    चाय- कॉफी के अधिक सेवन से बचें।
    चिकित्सकीय सलाह लेकर आयरन की नीली गोली लें ।

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