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बेगुसराय:-फिल्म डायरेक्टर एकता कपूर व शोभा कपूर की मुश्किलें और बढ़ी !

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बेगूसराय से आशुतोष सिंह की रिपोर्ट :

भारतीय सैनिकों व उनकी पत्नियों की छवि खराब करने के आरोप में बेगूसराय कोर्ट में मामला दर्ज !

बिहार के बेगूसराय कोर्ट में पूर्व सैनिक शंभू कुमार ने सीजेएम कोर्ट में सीरियल के माध्यम से भारतीय सेना की छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है। इसमें वेब सीरीज सीजन-दो के प्रोड्यूसर व डायरेक्टर एकता कपूर व शोभा कपूर को आरोपित बनाया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ धारा 499, 500, 501, 503, 504,124 अ, एवं भारतीय दंड विधान की धारा 66 के तहत परिवाद संख्या 524/2020 दर्ज हुआ है। टीवी सीरियल निर्माता एकता कपूर एवं शोभा कपूर पर भारतीय सैनिकों व उनकी पत्नियों की छवि खराब करने का आरोप है। अदालत ने उक्त दोनों को आगामी 8 फरवरी को बेगूसराय कोर्ट में उपस्थित होने का समन जारी किया है। अक्सर विवादों में रहने वाली एकता कपूर व शोभा कपूर की मुश्किलें अब और भी बढ़ गई है। बेगूसराय कोर्ट के न्यायिक दंडाधिकारी राजीव कुमार की अदालत ने भारतीय सैनिकों व उनकी पत्नियों पर आपत्तिजनक जीवन यापन करने गैर मर्दोंं के साथ संबंध रखने से संबंधित वेब सीरीज टू में प्रदर्शित सीन के विरुद्ध न्यायालय ने समन जारी किया है फिल्मी दुनिया की नामचीन निर्मात्रीएकता कपूर व शोभा कपूर के पत्नियों पर गैर मर्द सेेे संपर्क स्थापित करने एवं चारित्रिक पतन की सीमा लांग कर अपनी शारीरिक इच्छा पूर्ण करने से संबंधित प्रदर्शन अपने टीवी सीरियल एक्स सीरीज के सीजन टू में प्रदर्शित किया है। जो घोर आपत्तिजनक एवं समाज में विद्रूपता फैलाने वाला है । जिसका सीधा असर भारतीय सैनिकों के मनोदशा पर पड़ता है । या भारतीय सैनिकों के आपने सम्मान पर ठेस पहुंचाने वादा निहायत गैर जिम्मेदाराना हरकत है।

1 thought on “बेगुसराय:-फिल्म डायरेक्टर एकता कपूर व शोभा कपूर की मुश्किलें और बढ़ी !”

  1. फ़िल्म वाले आमजन की दुनियां भी अपनी दुनियाँ के सदृश ही आंकते हैं। इनके समाज और परिवार में ऐसी हरकतें आम बात है जो आये दिन अखबारों और पत्रिकाओं की सुर्खियां बनती रहती है। इनको इन बातों से कोई गुरेज भी नहीं। इनके संस्कार की परिभाषा कुछ इसी सरीखे हरकतों के इर्द गिर्द घूमती भी है।
    फिर इनके सोच का दायरा हो भी क्या सकता है ?
    लेकिन ऐसी विकृतियों को एक सभ्य समाज कतई बर्दास्त नहीं करेगा। इनके विरुद्ध कठोर से कठोरतम दंड का प्रावधान है जिसे न्यायपालिका शीघ्रातिशिघ्र सुनिश्चित करे।

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