रिपोर्ट -अनमोल कुमार
सीएम नीतीश का भाजपा से तलाक ले राजद संग सरकार बनाने की साफ आहट
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया की भी भूमिका, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी सक्रिय बिहार की सियासत पूरी तरह उबलने लगी है। सत्ता परिवर्तन की आहट साफ सुनाई देने लगी है। सभी दलों की सरगर्मियां को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि कभी भी किसी भी वक्त राज्य की राजनीति में भारी भूचाल आ सकती है। सभी खेमे की ओर प्रत्यंचा तन चुकी है...रणभूमि सज चुकी है...दुदुंभी भी बजने लगी है। इसी के साथ सूबे में 2017 दुहराने की प्रबल संकेत मिल रहे है। जब नीतीश कुमार राजद से तलाक लेकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। दरअसल, इस बार सरकार में भाजपा बड़े भाई की भूमिका है। काफी कम संख्या बल होने के बावजूद उसने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी। नीतीश कुमार सीएम तो बन गए लेकिन हर पल उन्हें इस बात की आशंका रहती है कि मोदी-अमित शाह की कार्यशैली जदयू को निगल न जाए। इसके पीछे कई कारण है। जैसे अबकी सरकार बनने पर नीतीश कुमार के लक्ष्मण कहे जाने वाले सुशील मोदी को भाजपा ने न सिर्फ सरकार में शामिल होने दिया बल्कि राज्यसभा में भेजकर बिहार की राजनीति से दूर भी कर दिया। यह अलग बात है कि बावजूद इसके सुशील मोदी बिहार की राजनीति में बने बने रह गए। साथ ही भाजपा ने दो उप मुख्यमंत्री का पद मांग कर नीतीश पर अंकुश बनाए रखने की कोशिश की। जबकि यह सर्व विदित है कि नीतीश कुमार की कार्यशैली भी नरेंद्र मोदी की तरह निरंकुश रहने की है। मोदी की तरह ही नीतीश भी अपने फैसलों से चौंकाते रहते है। दोनों के बारे में कहा जाता है कि इनके दिमाग में क्या चल रहा है कोई सियासत का जानकार तो क्या खुद भगवान ब्रह्मा भी नहीं बता सकते। खैर, नीतीश कुमार की भाजपा से दूरी की आहट सरकार बनने के साथ ही आने लगी थी, जो हाल ही में चार मोकों पर पीएम मोदी से मिलने से किसी न किसी बहाने गुरेज किया। इसी के साथ केंद्र में अपने कोटे से मंत्री रहे आरसीपी सिंह को दुबारा राज्यसभा न भेजकर उन्हे मंत्रीपद छोड़ने को मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्हें अपमानजनक तरीके से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के साथ ही उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़ दिए। बता दें कि आरसीपी को भाजपा का करीबी बताया जाता है। क्योंकि कई मौकों पर उन्होंने जदयू के हितों के खिलाफ जाकर भाजपा का साथ दिया था। अब ताजा घटनाक्रम में रात के अंधेरे में नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू यादव के पुत्र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ गुपचुप बैठक और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मोबाइल पर बातचीत ने परदे के पीछे से बिहार में लंबे समय से चल रहे सियासी ड्रामे को अब क्लाइमेक्स पर पहुंचा दिया है। अब एक नई तस्वीर निकल कर आ रही है कि नीतीश कुमार एक बार फिर राजनीतिक पलटी मारने की तैयारी में हैं। चर्चा गरम है कि भाजपा के साथ लंबे वक्त से असहज महसूस कर रहे नीतीश कुमार अब भाजपा से तलाक लेकर राजद गठबंधन से ब्याह रचाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। जिसमें सीएम तो नीतीश कुमार ही होंगे लेंगे लेकिन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव होंगे। इन अटकलों को बल तब मिली जब नीतीश कुमार ने मंगलवार को जदयू के सभी सांसदों और विधायकों को पटना तलब किया। वहीं राजद और CPI-ML ने भी अपने विधायक दल की बैठक मंगलवार को बुलाई है। दूसरी ओर यह भी खबर है कि बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल को दिल्ली बुलाकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विचार-विमर्श में लगा है। अब तो सूबे के अन्य सभी बड़े भाजपा नेताओं को दिल्ली बुला लिया गया है। इन घटनाक्रमों को एक साठ जोड़ने के बाद यह अटकलबाजी लगने लगी है कि बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन के बीच कभी भी तलाक हो सकता है और नीतीश कुमार महागठबंधन में फिर से शामिल हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि नए गठबंधन को लेकर नीतीश-सोनिया गांधी के बीच भी बातचीत हुई है। बताया यह भी जा रहा है कि सोनिया गांधी ने बिहार में नए राजनीतिक गठबंधन के लिए नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए पूरी तरह से आश्वस्त किया है। साथ ही केंद्र की राजनीति और वहां विपक्षी एकता को लेकर भी बातचीत हुई है। भाजपा की मौजूदा कार्यशैली पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई है। संभवतः इसी बातचीत के बाद राजद की तरफ से रविवार को बुलाए गए प्रतिरोध मार्च में कांग्रेस शामिल हुई थी। दरअसल, नीतीश कुमार और भाजपा के बीच कई मुद्दों को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहा है। साथ ही सहयोगी दलों के साथ हाल के दिनों में केंद्र सरकार के बर्ताव से नीतीश कुमार को भाजपा पर भरोसा खत्म सा हो गया है। जदयू के सूत्र बताते हैं कि ‘मोदी-शाह’ की कार्यशैली को देखते हुए नीतीश कुमार को ऐसी आशंका प्रबल लग रही है कि देर-सबेर भाजपा उन्हें भी राजनीतिक रूप से निपटा देगी। नीतीश कुमार के पास यह पक्का प्रमाण था कि आरसीपी सिंह के जरिए भाजपा कभी भी उन्हें बिहार की सत्ता से सत्ताच्युत कर सकती है। इसी कारण नीतीश ने ही आपरेशन आरसीपी कर भाजपा के प्लान को फिलहाल फेल कर दिया है। इस आशंका के कारण ही लंबे अरसे से नीतीश कुमार, भाजपा से खफा हैं और दूरी बना रखी है। इसके अलावा नीतीश कुमारने कुछ महीने पहले ही तेजस्वी यादव से नजदीकी भी बढ़ा ली थी और इफ्तार पार्टी में राबड़ी देवी के घर पैदल ही जाकर भविष्य के नाते राजनीतिक समीकरण का संकेत भी दे दिया था। अंधेरी रात में दोनों नेताओं के बीच जो बातचीत हुई है उसमें नए राजनीतिक समीकरण का फार्मूला तय होने की बात कही जा रही है। हालांकि दिल्ली से पटना तक सियासी माहौल गरम होने पर जदयू की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि अभी ऐसी कोई बात नहीं है। वहीं दूसरी ओर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने एक बयान में कहा है कि अगर नीतीश कुमार भाजपा के साथ पूरी तरह संबंध तोड़ लेते है तो राजद उन्हे गले लगाने को तैयार है। इससे साफ हो गया है कि राजद के साथ एक बार फिर दोस्ती की पृष्ठभूमि तैयार है। चूंकि नीतीश कुमार सीएम पद से कोई समझौता नहीं करने वाले है तो यह स्पष्ट है कि संभावित नई सरकार में तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम होंगे। इन सबके बावजूद मसला इस बार इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि अबकी राज्यपाल भाजपा के हैं। और वर्तमान सरकार को भंग करने तथा नई सरकार की गठन प्रक्रिया में राज्यपाल तक जाना ही होता है। यह अलग मुद्दा है कि राज्यपाल नीतीश के नए कदम को रोक नहीं सके लेकिन अवरोध तो पैदा कर ही सकते है। महाराष्ट्र इसका ताजा उदाहरण है। सियासी जानकारों के मुताबिक कुल मिलाकर इतना तो तय लग रहा है कि एक-दो दिनों में ही बिहार की राजनीति में जलजला आने के पूरे संकेत है...इंतजार कीजिए कल की। सत्ता परिवर्तन की इबारत लिखी जा रही है, बस सामने आने की देर है।




