गंगा के बढ़ते जलस्तर से दिघवारा में भयानक कटाव की स्थिति!

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छपरा से रमेंद्र सिंह राजन की रिपोर्ट :-

दिघवारा प्रखंड के बतरौली मौजे में हो रहा गंगा नदी की धारा से कटाव , स्थिति भयावह :

लोगो ने किया बोल्डर पिचिंग समेत कटाव सुरक्षात्मक उपाय करने की मांग
दिघवारा प्रखंड के बतरौली मौजे में हो रहे गंगा नदी के कारण कटाव को लेकर अकीलपुर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रत्यासी जद यू नेता संजय कुमार सिंह के नेतृत्व के ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कटाव स्थल पर जल्द से जल्द कटाव निरोधी कार्य करवाने की मांग किए है।।
इस बाबत दर्जनों ग्रामीणों ने शंकर पूर पट्टी गंगा तट पर बने ढलाई सरक के समीप खरे होकर प्रदर्शन किया।

ज्ञात हो कि गंगा नदी में जलस्तर की बढ़ोतरी से जहां एक ओर प्रखंड के अकिलपुर पंचायत के लोगो में बाढ़ का डर सताने लगता है।वहीं दूसरी ओर पंचायत के गंगा नदी से सटे राजस्व ग्राम की जमीनों के स्वामियों को अपनी भूमि के कटाव का खतरा मंडराने लगता हैं।
गंगा नदी के दक्षिण अवस्थित इस पंचायत के राजस्व ग्राम बतरौली , फरहद्दा स्लहली आदि गांवों की जमीनों का कटाव हर वर्ष गंगा नदी से हो रहा है।इस कारण प्रति वर्ष सैकड़ों बीघे की जमीन गंगा नदी में समा जा रही है।
भूस्वामी किसान पहले तो सरकार द्वारा टोपो भूमि बताकर सरकारी रसीद अधिकार से वंचित किए जा रहे है। वही रसीद के अभाव में भी किसान अपनी जमीन को जोत आबाद करने का प्रयास कर रहे है। तब उनकी यह जमीन गंगा के कटाव में विलीन होती जा रही है।

किसानों के द्वारा उठाए गय आवाज के बाद भी सरकारी तंत्र के सुस्ती के कारण लोगो को परेशानी उठानी पर रही है।

कटाव में कट रही ढलाई सरक
अकीलपुर दियारे की लाइफलाइन शंकर पूर पट्टी नदी घाट पर बनी ढलाई सरक जो पूरे दियारे तक जाने आने का पहुंच पथ है। वह सरक भी अब कटाव के कारण ध्वस्त हो रहा है।
गांव पर भी मंडरा रहा खतरा

संजय सिंह के अनुसार धीरे धीरे गांव की तरफ यह कटाव बढ़ रहा है।समय रहते अगर सरकारी तंत्र कटाव निरोधक कार्य समय रहते नहीं किया गया तब भयावह असर देखने को मिल सकता है। और पूरे दियारे में एक बार पुनः गांव का विस्थापन देखने को मिल सकता है।

पूर्व में दियारे की कई गांव समा चुकी है गंगा में

गंगा नदी के दक्षिणी एवम उतरी किनारे पर अवस्थित गांव हाबसपुर ,हेतन पूर ,गंग हारा ,शंकर पूर , फरहदा , अनु चक , समेत दर्जनों गांव गंगा नदी के कटाव में विलीन हो चुके है।और इन गावों के बासिंदो को अपना नया ठिकाना तलाश करना पड़ा है।

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