कलयुग के श्रवण,माता-पिता को कांवड़ पर बिठाकर चले बाबा धाम!

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धीरज शर्मा की रिपोर्ट:-

कहा मनोकामना पूर्ण हुई तो माता-पिता को कांवड पर बिठाकर चले बाबा का जलाभिषेक करने!

मनोकामना पूरी होने पर वृद्ध माता पिता ने देवघर जाने की जताई ईच्छा बेटे और बहू ने एक बहंगी तैयार कर श्रवण कुमार की तरह कंधे पर लादकर चल पड़ा माता पिता को तीर्थ कराने बाबाधाम। बहंगी के आगे पुत्र तो पीछे से बहु ने उठा रखा है भाड़।सुल्तानगंज गंगा घाट से चलकर देवघर के लिए किया है प्रस्थान माता पिता के प्रति समर्पित बेटे बहु की लोग जमकर प्रशंसा कर रहे हैं। कलयुग के श्रवण कुमार का असल में नाम चंदन कुमार है बहू रानी देवी ये बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले हैं।सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर के लिए प्रस्थान किया है।चंदन कुमार ने बताया कि हम प्रत्येक महीने सत्यनारायण व्रत का पूजन करते हैं और उसी के दौरान मन में इच्छा जाहिर हुई माता और पिताजी को बाबाधाम की पैदल तीर्थ कराने का।लेकिन माता और पिताजी वृद्ध हैं तो ऐसे में 105 किलोमीटर की लंबी यात्रा पैदल तय करना संभव नहीं था।इसके लिए मैने अपनी पत्नी रानी देवी को बताया तो उन्होंने ने भी इसमें अपनी भागीदारी देने की हिम्मत दी। जिसके बाद मैने निर्णय लिया कि माता पिता को हम बहंगी में बिठाकर अपने कंधे के बल इस यात्रा को सफल करेंगे।इसी दौरान मैंने एक मजबूत कांवड़नुमा बहंगी तैयार करवाया और सुल्तानगंज से जल भरकर उस बहंगी में आगे पिताजी और पीछे माताजी को बिठाकर यात्रा शुरू की है। जिसमें बहंगी के आगे हिस्से को मैंने अपने कंधे पर लिया है जबकि मेरी पत्नी रानी देवी पीछे से सहारा दे रही है।उन्होंने बताया कि लंबी यात्रा है समय लगेगा लेकिन हम इस यात्रा को जरूर सफल करेंगे।वहीं उसकी पत्नी रानी ने बताया कि इनके मन में इच्छा जाहिर हुई तो मुझे भी इसमें भागीदार बनने का मन हुआ।हमलोग खुश हैं कि अपने सास ससुर को बाबाधाम की यात्रा कराने निकले हैं और लोग भी हम लोगों को हिम्मत दे रहे हैं और प्रसंशा कर रहा है। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है
वहीं चंदन की माता ने बताया कि हम तो आशीर्वाद ही दे सकते हैं।भगवान से प्रार्थना है कि मेरे पुत्र को सबल बनाए।

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