पारंपरिक तरीके से भगवान मधुसूदन की निकाली गई रथ यात्रा, कोरोना के चलते श्रद्धालुओं की रही कमी!

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पंकज कुमार ठाकुर!

बांका। जिले के बौंसी प्रखंड स्थित मंदार में भगवान मधुसूदन की रथयात्रा गुरुवार को जयकारे के बीच निकली। भगवान मधुसूदन की शोभा यात्रा गरुड़ रथ पर बिठाकर निकाली गई गई। इसमें सेकड़ों लोगों ने शरीक हो भगवान मधुसूदन की पूजा-अर्चना की। हालांकि कोरोना की वजह से इस बार का रथ यात्रा फीका रहा। जिला प्रशासन ने कोरोना गाइडलाइन के तहत रथ यात्रा निकलने की अनुमति दी थी। जिसके चलते हजारों की जुटने वाली भीड़ सेकड़ों में सिमट कर रह गईं।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ निकाली गई रथ यात्रा

विद्वान पंडितों द्वारा वेद-मंत्रोच्चारण के बीच अभिषेक कर रथयात्रा का श्रीगणेश किया। रथयात्रा के आगे-आगे नागाड़ा, झाल, करताल के साथ उद्घोष करते महंथ भोली बाबा आश्रम के शिष्यों के साथ पंडा समाज के लोग सहित श्रद्धालुओं की सीमित भीड़ रेलवे स्टेशन रोड, गांधी चौक होते हुए महावीर मंदिर चौक पहुंचे। जहां से पुन: मेन चौक होते हुए बौंसी मेला रोड की ओर रथ वापस हुआ। इस दौरान स्थानीय धर्मानुरागियों द्वारा अभिषेक किया गया। वहीं मारवाड़ी समाज के लोगों ने भगवान मधुसूदन की पूजा अर्चना कर नैवैद्य से अभिषेक किया। रथयात्रा के दौरान लोगों ने मिठाई, बतासा चढ़ाए। रथ को खिंचने की होड़ मची रही। मधुसूदन नगरी बौंसी में रथयात्रा की परंपरा काफी पुरानी है। जो जगन्नाथपुरी के भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा की रथयात्रा की तरह होती है। अच्छी फसल की कामना को लेकर स्थानीय कृषक भगवान मधुसूदन से मन्नत मांगते हैं।

कोरोना के चलते श्रद्धालुओं की रही कमी
बौंसी में निकलने वाले भगवान मधुसूदन के रथ यात्रा में हर वर्ष 50 हजार से अधिक लोग शामिल होते थे। सड़कें श्रद्धालुओं से भरी रहती थी। लेकिन इस बार ऐसा न हो सका। मंदार में भगवान मधुसूदन की रात यात्रा पूरे अंग क्षेत्र में प्रसिद्ध है। बिहार के अलावा झारखंड और बंगाल से भारी संख्या में श्रद्धलुओं का जमावड़ा लगता था। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं को कोरोना के चलते निराशा हाथ लगी और रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाने का मलाल उनके जेहन में रहेगा।

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