कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर,!
(हम बोलेगा तो कहेगा कि बोलता है)
सरकार बार-बार खर्चे की कटौती करने के लिए अपने सांसदों को प्रेरित करते हैं।लेकिन आंकड़ा कुछ और बयां करता है खुलासा तब हुआ जब मध्य प्रदेश के चंद्रशेखर गॉड द्वारा दायर सूचना के अधिकार के जवाब में लोकसभा सचिवालय ने कहा कि 2017-18 से 2021-22 तक उसे मौजूदा सांसदों की यात्रा भत्ता के लिए रेलवे से 35.21 करोड रुपए और अपूर्व माननीय सांसद के यात्रा का बिल 26.82 करोड़ मिला है दरअसल प्रक्रिया के अनुरूप रेलवे का वेतन एवं लेखा विभाग बिलों को लोकसभा सचिवालय को भेजता है। अब गौर करें तो पिछले 5 वर्षों में सांसदों ने 62 करोड़ हवा में फूंक दिया। 20 _21 सत्र में ढाई करोड़ रुपये फूंका गया! दरअसल मौजूदा सांसद रेलवे के प्रथम श्रेणी वातानुकूल में यात्रा कर सकते हैं और उनके पति या पत्नी कुछ शर्तों पर यात्रा कर सकते हैं। अब ऐसे में लोगों के जेहन में सवाल दौड़ना लाजमी है आखिर जनता के पैसे को तारणहार और कृपा निधान कैसे हवा में उड़ा सकते हैं।




