ज्ञानवापी विवाद-बाबा मिल गए, बुद्ध पूर्णिमा पर सत्य पुनः प्रकट हुआ ।

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पंकज कुमार ठाकुर ( कार्यकारी संपादक)

माननीय न्यायालय ने स्थल सील कर शिवलिंग के संरक्षण का आदेश दिया ।।।

“मुझे तो मरना है पर आपका तप बड़ा है, आपको सदियों तक इंतजार करना है” काशी में मंदिर के बाहर बैठे नंदी के कान में ये वाक्य बोल कर उस पुजारी ने शिवलिंग के साथ ज्ञानवापी में छलांग लगा दी….

औरंगजेब की सेना ने काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने के लिए पूरे क्षेत्र को घेर लिया था

पूरे काशी में मुग़ल सैनिकों के हाथों में तलवारें और मंदिर को छोड़कर भागते लोगों की चीखें ही दिखाई और सुनाई दे रहीं थी

तब एक पुजारी ने हिम्मत दिखाई और महादेव के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए शिवलिंग के साथ ही ज्ञानवापी कुएं में कूद गए……
353 साल पुराना ज्ञानवापी कुंड काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तार में कॉरिडोर का हिस्सा बना लेकिन ये तस्वीर उन्हीं नंदी महाराज की है जो सालों तक अपने महादेव की ओर मुंह करके मंदिर के पुनरुत्थान की प्रतीक्षा कर रहे है

350 साल से अपने महादेव की प्रतीक्षा करते इस नंदी की प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है ।

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