कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर
उखाड़ रहे थे बाबा बुलडोजर की सत्ता, अपने पार्टी का अस्तित्व खत्म!
:दिल के अरमा आंसुओं में बह गए माया मिली ना राम? शायद यही कह कर अपने आप को वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को अपने आप को कोस रहे होंगे।अब साहब के लिए कहना लाजमी होगा चंद घंटों में सियासत धूल धूसरित पूरी राजनीति साहेब के जो दिल में ख्वाब चल रहे थे वह भी टूट गया कहते हैं ना डूबते को तिनके का सहारा लेकिन साहब की पूरी नैया ही डूब गई! दरअसल कहानी की शुरुआत हुई उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जहां मुकेश सहनी ने पहुंचकर बाबा बुलडोजर को खुलेआम ललकार दिया और बाबा को उखाड़ फेंकने की शपथ ली कई राजनीति विश्लेषक बताते हैं कि चुनाव के वक्त ही मुकेश साहनी पर भाजपा की केंद्रीय टीम पूरी तरह नजर बनाकर काम कर रही थी और उत्तर प्रदेश चुनाव खत्म होते ही मुकेश साहनी की पार्टी का अस्तित्व भी खत्म हो गया। दरअसल उनके तीनों विधायकों ने भाजपा की शपथ ले ली। अब ऐसे में फिलहाल उनके पास एक भी विधायक नहीं है। दरअसल मुकेश साहनी ने भाजपा के 53 सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए थे। उसको और भी जोड़कर कई विश्लेषक देख रहे हैं। हालांकि उन्हें एक सीट पर भी जीत नहीं मिल पाई कहते हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव में मुकेश साहनी ने सोशल मीडिया और अखबारों के जरिए भी भाजपा को वोट नहीं देने की अपील किया था। अब सवाल उठता है सियासत में ऐसे लोग आते हैं कहां से जिन्हें ठीक से राजनीति तक समझ नहीं आती। और सीएम बनने का ख्वाब पालने लगते हैं। और बड़े-बड़े नेताओं के गिरेबान तक पहुंच जाते हैं । यकीन नहीं आता तो ताजा मामला उत्तर प्रदेश का देख ले स्वामी प्रसाद मौर्य, और बिहार में मुकेश सहनी जिसे माया मिला ना राम।




