धीरज शर्मा की रिपोर्ट
सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर पीस सेंटर परिधि द्वारा मशाल जुलूस निकाला गया। महिला अधिकार, लैंगिक समता और विश्व शांति सद्भाव के लिए आयोजित मशाल जुलूस लाजपत पार्क से शुरू होकर शहीद चौक घंटाघर पर सभा में तब्दील हो गया। इस अवसर पर महिला हिंसा, सामाजिक भेदभाव, पैतृक संपत्ति में बराबरी, भ्रूण हत्या, राजनीति में बराबर की हिस्सेदारी, स्व निर्णय का अधिकार पर केंद्रित नारे लगाए गए। देवी नहीं इंसान है, औरत मर्द समान है, लड़का हो या लड़की पैतृक संपत्ति सबकी, राज में आधा काज में आधा, युद्ध नहीं शांति चाहिए, आधी आबादी मांगे आजादी आदि स्लोगन के माध्यम से महिला अधिकार की बात की गई। महिलाओं ने कहा कि युद्ध और अशांति में हमेशा महिलाएं ही सबसे अधिक पीड़ित होती रही है। चाहे हारा हुआ समाज हो या जीता हुआ दोनों अपना क्षोभ या जश्न औरतों को नोच कर ही मनाता है। युद्ध और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती । द्वितीय विश्व युद्ध के घाव आज भी हजारों महिलाएं झेल रही हैं। फिर से रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। इससे सिर्फ यूक्रेन वासी ही नहीं बल्कि भारत के भी लोग दुखी हैं। वहां पढ़ने वाले बच्चों की पीड़ा कोई समझ नहीं सकता। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पूरी दुनिया में महिला अधिकारों की बात की जाती है पर यह सिर्फ महिलाओं के मांगने से नहीं बल्कि पुरुषों के अधिकार देने पर निर्भर करता है। 2005 में पैतृक संपत्ति पर बराबरी के अधिकार का कानून बन जाने के बावजूद आज भी बहनों को बेटियों को संपत्ति में अधिकार नहीं दिया जा रहा। महिला अधिकारों के लिए सामाजिक बदलाव जरूरी है। मशाल जुलूस में तहरून निशा, अजमी शेख, सुषमा, राफिया अतहर, शुक्रिया लाडली राज कोमल, मुस्कान डॉली रिचा मनीषा सिमरन दास अंशु मिस्टी तनुजा वर्षा कुमारी समय आदि शामिल हुई।




