1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति की मांग को ले कर निकली गई जन आक्रोश महारैली

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सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट

बांझी में पीर दरगाह की जमीन पर बनने वाले हवाई अड्डे का किया विरोध

साहिबगंज

1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति को लागू करने की मांग को लेकर आज जिले में आदिवासी समाज के हजारों महिला पुरुषों ने ढोल मादर व पारम्परिक हथियारों से लैस हो कर शहर में जन आक्रोश महारैली निकली|जनाक्रोश महारैली कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्टेशन चौक से शुरू की गई|विभिन्न चौक चौराहों से होकर रैली समाहरणालय परिसर तक जाएंगी,जहां जनाक्रोश महारैली में शामिल आदिवासी समाज के लोग वर्तमान हेमंत सरकार के खिलाफ अपना विरोध जाहिर करते हुए प्रदर्शन करेंगे। आज की इस जनाक्रोश महारैली में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए हेमंत सरकार से मांग की है की राज्य में 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति को अविलंब लागू किया जाए, साथ ही बांझी के पीर दरगाह की जमीन पर प्रस्तावित हवाई अड्डे का भी विरोध किया गया है। इसके आलावा सरकारी नौकरियों में स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता की मांग भी इस जन आक्रोश महारैली के माध्यम से की गई है, बता दें की इस महारैली की सुरक्षा के लिए जिरवाबारी ओपी के साथ नगर थाने की पुलिस उपस्थित थी। ध्यान रहे की पिछले महीने की 12 तारीख को हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा ने इस हवाई अड्डे के निर्माण को ले कर घोषणा की थी, मगर अब आदिवासी समाज द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद हवाई अड्डे के निर्माण में अड़चन आने की आशंका जताई जा रही है।

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