भाषाई संगठन ने की अंतिम सर्बे रेकार्ड के आधार पर स्थानीय नीति निर्धारण की मांग

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ब्यूरो रिपोर्ट

राज्य में बांग्ला भाषियों की उपेक्षा कर कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता – गौतम चटर्जी

रानीश्वर(दुमका)

बांग्ला भाषा व संस्कृति रक्षा समिति झारखंड राज्य का एकमात्र भाषाई संगठन है जो दो दशक से राज्य में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति लागू करने की मांग करता आ रहा हैं ।हाल में सिदो कान्हू मुर्मू बिश्व विद्यालय का छात्र संगठन भी 1932 खतियान के आधार पर स्थानीय नीति निर्धारण करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरा था ।समिति ने उस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया हैं ।समिति ने बिभिन्न सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को तेज करने की तैयारी शुरू कर दी हैं ।समिति के प्रदेश सचिव गौतम चटर्जी ने यहां झारखंड आंदोलनकारी,ग्राम प्रधान माझी संगठन, माझी परगना समिति, मूलवासी-आदिवासी रैयत संघर्ष समिति, घटवार घटबाल संयुक्त युवा मंडली ,मुखिया संघ के साथ समन्वय समिति गठन करने को लेकर बैठक की हैं|सोमबार को पथ निर्माण विभाग के रघुनाथपुर स्थित निरीक्षण भवन परिसर में संथाल काटा पोखर स्मारक समिति के अध्यक्ष श्याम राय के अध्यक्षता एवं झामुमो के पूर्व जिला अध्यक्ष सह झारखंड आंदोलनकारी अशोक मुर्मू के संचालन में हुई बैठक में बिभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।अपने संबोधन में बांग्ला भाषा व संस्कृति रक्षा समिति के प्रदेश सचिव गौतम चटर्जी ने बताया कि संथाल परगना की भाषा नीति एवं स्थानीय नीति निर्धारण हेतु संभावित आंदोलन राज्य में चल रहे आंदोलन को अलग दिशा देगा ।सूबे की बांग्ला भाषी संख्या बहुल आबादी यहां के मूलवासी हैं ।झारखंड के शिक्षा, स्वास्थ्य ,एवं विकास में बांग्ला भाषियों की अहम भूमिका रही हैं ।झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में बंगालियों का योगदान रहा हैं ।राज्य में बांग्ला भाषियों को उपेक्षा कर कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता हैं ।बीते दिन ग्रेटर मानभूम के कई अखिल भारतीय आदिवासी बिकास परिषद के सदस्यों ने बांग्ला को बाहरी भाषा बताया हैं ।इसका तीब्र बिरोध करते हुए गौतम ने बताया कि अंतिम सर्वे रेकार्ड बांग्ला भाषा मे हैं ।आंदोलन को कमजोर करने के लिये बांग्ला भाषा को बाहरी भाषा बोला जा रहा हैं, जबकि जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा एवं लोक सभा मे बांग्ला में शपथ लिया हैं।अशोक मुर्मू ने जिलावार स्थानीय भाषा की राज्य सरकार द्वारा निर्गत अधिसूचना को वापस लेने की मांग की हैं ।प्रमंडल के सभी छह जिला में अंगिका को सूची से अलग करने की मांग की हैं ।बैठक में अजय कुमार सिंह ,बिकास चंद्र दास, बख्सिस हुसैन खान, रफीक खान टी. के. राय ,कानाई पाल ,बिनोद कुमार मंडल, जिया राम राय ,ग्राम प्रधान कृष्ण चंद्र घोष, बाबुधन मुर्मू ,कुशल हांसदा ,अकाल राय मनोज कुमार राय एवं अन्य लोग मौजूद थे ।

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