सरकारी उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक लाठी पहाड़ गांव आज भी विकास से कोसों दूर

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ब्यूरो रिपोर्ट

इसी लाठी पहाड़ की गुफा में छुपकर स्वतंत्रता सेनानी लेते थे अंग्रेजों से लोहा

ग्रामीणों की लाठी पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

रामगढ़ (दुमका)

रामजी साह की रिपोर्ट

रामगढ़ प्रखंड के बरमसिया पंचायत अन्तर्गत ऐतिहासिक लाठी पहाड़ की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित लाठीपहाड गांव आज भी विकास से कोसों दूर र है||ज्ञात हो कि इसी ऐतिहासिक लाठी पहाड़ के गुफा में यहां के स्थानीय जांबाज छुपकर रहते थे और अंग्रेजी सेना से लडाई लडते थे|17 फरवरी 1943 में लाठी पहाड़ को अंग्रेजी सैनिकों ने चारो और से घेर लिया था और दोनों ओर से गोलियों तथा तीन धनुष से लडाई छिड़ गई |अंत में जांबाजों ने अंग्रेजी सेना को भागने पर मजबूर कर दिया था| इस लड़ाई में स्वतंत्रता सेनानी लाल हेम्ब्रम,पगान मरांडी,पयिका मुर्मु, मुंशी हांसदा,प्रधान हेम्ब्रम,लोदो हेम्ब्रम,तेजू राय, अलखी मांझी समेत कई जाबांज गंम्भीर रुप से अंग्रेजों की गोली से घायल हो गये थें|उन्ही की याद में हर बर्ष लाठी पहाड़ की गुफा की पास कार्यालय प्रागंण में अमर शहीदो को याद कर झंडारोहण किया जाता है|.लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर लाठी पहाड़ को सरकार द्वारा अब तक उपेक्षित रखा गया है, जबकि यहां सौन्दर्यीकरण करके इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिया जा सकता है|दो बर्ष पूर्व दुमका के भाजपा सांसद सुनील सोरेन ने लोगो को लाठी पहाड़ के सौन्दर्यीकरण की बात कही थी लेकिन आज तक इसमें अमल नही हुआ और लोगो के लाठी पहाड़ के सौन्दर्यीकरण का सपना ,सिर्फ सपना बनकर रह गया है|

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