🇦🇫 अफगानिस्तान में रह गए हैं सिर्फ चंद सिख !

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आलोक कुमार झा अमेरिका से शंखनाद के लिए

अफगानिस्तान में अब मुश्किल से 140 सिख बचे हैं. इन लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि जाएं या रुकें. कुछ लोग भारत जाकर लौट आए हैं क्योंकि वहां कुछ नहीं मिला. काबुल के जिस गुरुद्वारे में कभी विशाल संगतें हुआ करती थीं, वहां अब वीराना पड़ा है. काबुल में एक ही गुरुद्वारा है जिसकी देखरेख करने वाले गुरनाम सिंह खाली आंगन को निराशा से देखते रहते हैं. वह बताते हैं, “अफगानिस्तान हमारा देश है, हमारी सरजमीं है. पर हम पूरी निराशा के साथ इसे छोड़ रहे हैं.” 1970 में अफगानिस्तान में सिखों की आबादी एक लाख से ज्यादा थी. दशकों से जारी युद्ध, गरीबी और समाज में बढ़ी असहिष्णुता ने हालात बदल दिए हैं. पहले सोवियत संघ के कब्जे, फिर तालिबान का खूनी राज, उसके बाद अमेरिका का आक्रमण इस सिख आबादी पर ऐसा भारी गुजरा कि देश में पिछले साल मात्र 240 सिख बचे थे ▪️

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