रिपोर्ट – अभिषेक कुमार!
गयाजी में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच गया के मूर्तिकार विक्की बिंदु अपनी अनोखी कलाकारी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वे करीब 50 हजार पेंसिलों और उनके छिलकों से मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। यह प्रतिमा कला और आस्था के अनोखे संगम का उदाहरण बन रही है।
इस प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी और रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। मां दुर्गा के साथ माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती, कार्तिकेय, शेर और महिषासुर की प्रतिमाएं भी पेंसिल से जुड़ी सामग्री और छिलकों से बनाई जा रही हैं।
मूर्तिकार विक्की बिंदु को यह अनोखा विचार उस समय आया, जब उन्होंने बच्चों को पेंसिल छीलकर उसके छिलके फेंकते देखा। इसके बाद उन्होंने बेकार समझे जाने वाले छिलकों से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का फैसला किया। पिछले डेढ़ महीने से वे लगातार इस काम में जुटे हैं। प्रतिमा निर्माण में अब तक करीब 20 हजार पेंसिलों का इस्तेमाल हो चुका है। पूरी प्रतिमा तैयार करने में लगभग एक लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले के रहने वाले विक्की बिंदु को मूर्ति कला अपने पिता से विरासत में मिली है। वे पहले इंजीनियर के रूप में काम करते थे, लेकिन कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद उन्होंने मूर्ति कला को ही अपना मुख्य पेशा बना लिया। इससे पहले भी वे बांस, सिल्वर और अन्य अनोखी सामग्रियों से प्रतिमाएं बना चुके हैं।
यह अनूठी प्रतिमा गया शहर के फतेहगंज रोड में स्थापित की जाएगी। इसे देखने के लिए अभी से लोग उत्सुक हैं। विक्की बिंदु की यह पहल न केवल कला और आस्था का अद्भुत संगम है, बल्कि बेकार समझी जाने वाली चीजों के रचनात्मक इस्तेमाल का संदेश भी देती है।


