प्राकृतिक-पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म एवं सोलराइजेशन की परियोजनाओं पर पी.पी.पी. मोड मेंतेजी से काम करें- सीएम

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:- रवि शंकर अमित!

प्राकृतिक-पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म एवं सोलराइजेशन की परियोजनाओं पर पी०पी०पी० मोड में
तेजी से काम करें :- मुख्यमंत्री

मुख्य बिन्दु :-

ओढ़नी डैम, खड़गपुर डैम, ताराकोल डैम एवं जालकुंड डैम सहित अन्य जलाशयों के आसपास पर्यटकीय सुविधाओं के विकास में तेजी लाने का निर्देश। कसरैया धार (खगड़िया) ईको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश।

पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म के विकास के लिये पर्यावरण अनुकूल एवं टिकाऊ सामग्री का उपयोग करें।

जहां पर्यटकीय दृष्टि से रोप-वे की आवश्यकता है, वहां रोप-वे के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जाए।

राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सोलराइजेशन कार्य करायें ताकि ग्रीन ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके।

बड़े तालाबों एवं जलाशयों के चारो तरफ बड़े पैमाने पर पौधारोपण का कार्य जल्द से जल्द पूर्ण कराएं।

पटना, 05 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक हुयी। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर ने प्रस्तुतीकरण के के माध्यम से विभाग के कार्यों की अद्यतन जानकारी दी। उन्होंने राज्य में ईको टूरिज्म के विकास की संभावनाओं, जलाशयों एवं डैम के आसपास पर्यटकीय सुविधाओं के विकास, पौधारोपण तथा पर्वतीय एवं वन क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

बैठक में बांका के ओढ़नी डैम, मुंगेर के खड़गपुर डैम, नवादा के ताराकोल डैम तथा मुंगेर के जालकुंड डैम के आसपास इको टूरिज्म एवं पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही खड़गपुर डैम के पास इको टूरिज्म के लिए आवश्यक अवसंरचना विकसित करने तथा पर्यटकों के आकर्षण के लिए ‘ग्लास रूम’ के निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर ईको टूरिज्म के विकास के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यकतानुसार भूमि का क्रय/अधिग्रहण कर पी०पी०पी० मोड (जन-निजी भागीदारी) पर इको टूरिज्म की योजनाएं विकसित की जाय।

उन्होंने ताराकोल डैम एवं जालकुंड डैम के आसपास इको-टूरिज्म के विकास के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्रवाई करने तथा कसरैया धार (खगड़िया) को ईको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के बड़े तालाबों एवं जलाशयों के चारों तरफ व्यापक स्तर पर पौधारोपण कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पौधारोपण का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे जल्द से जल्द पूर्ण करायें। राज्य के हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल चीजों का ही इस्तेमाल किया जाए। बांस, लकड़ी आदि प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां पर्यटकीय दृष्टि से रोप-वे की आवश्यकता है, वहां रोप-वे के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सोलराइजेशन कार्य करायें ताकि ग्रीन ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को संबद्ध विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरण का संरक्षण करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले और पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ० रामचन्द्र प्रसाद, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरविंदर सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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