न्यायिक अधिकारियों ने मंडल कारा सुपौल का किया निरीक्षण, समस्याओं की ली जानकारी!

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान

सुपौल :- प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) राजेश कुमार बच्चन के निर्देश पर मंगलवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) राम चंद्र प्रसाद एवं डीएलएसए के सचिव अमित गौरव ने मंडल कारा, सुपौल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारा की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ बंदियों की समस्याओं और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही विधिक एवं चिकित्सकीय सुविधाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग बंदियों से बातचीत कर उनके मुकदमों की वर्तमान स्थिति, न्यायालय में चल रही कार्यवाही, विधिक सहायता की उपलब्धता तथा व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से ऐसे बंदियों से बातचीत की गई, जो आर्थिक अथवा अन्य कारणों से अपने लिए निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं हैं। अधिकारियों ने पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
अधिकारियों ने कहा कि कोई भी पात्र बंदी केवल आर्थिक असमर्थता के कारण न्याय पाने से वंचित नहीं होना चाहिए। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

जेल किचन में भोजन की गुणवत्ता की जांच

निरीक्षण के क्रम में सीजेएम एवं डीएलएसए सचिव ने मंडल कारा के रसोईघर (जेल किचन) का भी जायजा लिया। यहां बंदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, साफ-सफाई और भोजन वितरण की व्यवस्था की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने संबंधित कारा पदाधिकारियों को भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने तथा रसोईघर में साफ-सफाई एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया।

कारा अस्पताल की व्यवस्थाओं का भी लिया जायजा

तत्पश्चात न्यायिक अधिकारियों ने कारा अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सकीय सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल की साफ-सफाई तथा स्वास्थ्य संबंधी अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने जरूरतमंद बंदियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान मंडल कारा में साफ-सफाई, पेयजल, मूलभूत सुविधाओं और बंदियों के कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। संबंधित कारा पदाधिकारियों को बंदियों के अधिकारों एवं कल्याण से संबंधित प्रावधानों का समुचित अनुपालन सुनिश्चिपत करने को कहा गया।
डीएलएसए सचिव अमित गौरव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि पात्र बंदियों को समय पर प्रभावी विधिक सहायता मिले और किसी भी व्यक्ति को आर्थिक असमर्थता के कारण न्यायिक प्रक्रिया में कठिनाई का सामना न करना पड़े।
यह निरीक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए, सुपौल राजेश कुमार बच्चन के मार्गदर्शन में बंदियों के अधिकारों, कल्याण और न्याय तक उनकी सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

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