आरा/आशुतोष पाण्डेय!
जल संरक्षण के दावों के बीच जिला प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी पर उठे सवाल
आरा। ‘जल ही जीवन है’ का संदेश भले ही लगातार दिया जाता हो, लेकिन आरा में इसकी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। जिलाधिकारी कार्यालय से कुछ ही दूरी पर पाइप फटने के कारण लगातार हजारों लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पाइप से इतनी तेज रफ्तार में पानी निकल रहा है कि महज एक मिनट में ही बड़ी मात्रा में पेयजल सड़क पर बह जा रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन के प्रमुख कार्यालय के आसपास ही पानी की इस बर्बादी पर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं जा रहा है। पाइप फटने के कारण लगातार पानी बहने से जहां पेयजल की बर्बादी हो रही है, वहीं सड़क पर जलजमाव और कीचड़ की स्थिति भी उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण और पानी की एक-एक बूंद बचाने का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण हजारों लीटर पानी यूं ही नालियों और सड़कों पर बह रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से तत्काल क्षतिग्रस्त पाइप की मरम्मत कराने और पानी की बर्बादी रोकने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी कार्यालय के आसपास ही पानी की इस तरह बर्बादी हो रही है, तो शहर के दूसरे हिस्सों में जल संरक्षण की व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी होगी?



