रिपोर्ट- अमित कुमार!
बिहार – मुकुंद राव शोध संस्थान के तत्वावधान में आज बिहार विधान परिषद के एनएक्सी सभागार में लेखक मिथिलेश कुमार सिंह द्वारा लिखित पुस्तक “शूद्रों का सच” का विमोचन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी, बिहार के संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने पुस्तक के विषय को सामाजिक समरसता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

परिचर्चा के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और विचारकों ने अपने-अपने उद्गार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल इतिहास का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक वैचारिक चुनौती है। पुस्तक में तर्क और तथ्यों के साथ यह सिद्ध किया गया है कि शूद्र प्राचीन भारत में सम्मानित, शक्तिशाली और विद्वान वर्ग का हिस्सा थे, और कवष ऐलुष, सत्यकाम जाबाल जैसे अनेक वैदिक ऋषि शूद्र थे।

लेखक मिथिलेश कुमार सिंह ने बताया कि ‘शूद्र’ शब्द को सैकड़ों वर्षों से अपमान का पर्याय बना दिया गया, जबकि मूल रूप से वह पवित्रता का द्योतक था। यह पुस्तक इतिहास की उन परतों को उधेड़ती है जिसे योजनाबद्ध ढंग से दबा दिया गया था।
इस अवसर पर शहर के कई साहित्यकार, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।




