सहारा ने किया अपने निवेशकों को बेसहारा,भुगतान की मांग को ले कर सड़क पर आए निवेशक

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सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट

साहिबगंज

आज स्थानीय सहारा कार्यालय में निवेशकों ने अपने भुगतान को ले कर धरना प्रदर्शन कर भुगतान की मांग की|परन्तु कार्यालय का कोई कर्मचारी न तो अपने निवेशकों से मिलने आया और न ही उनकी किसी बात को उनके द्वारा सुना गया| ऐसे में ये कैसे कहा जा सकता है की आने वाले समय में निवेशकों को उनका भुगतान होगा|बता दें कि साहिबगंज शाखा में हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपए जमा है, जिसको जमा करते समय तो समय पर भुगतान करने का वादा कार्यालय कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था, मगर जमा हुए पैसों की मियाद पूरी होने के बाद भी उनका भुगतान शाखा कार्यालय द्वारा नही किया जा रहा है, और उन्हे भुगतान के बदले सिर्फ समय दिया जा रहा है| ऐसा कोई महीने दो महीने से नही हो रहा, ये सब तकरीबन पिछले 2 वर्षों से हो रहा है|इसी बात से नाराज निवेशकों ने आज कार्यकाल के समक्ष धरना प्रदर्शन किया|आज शांतिपूर्ण तरीके से हुए धरने के दौरान सहारा का कार्यालय तो खुला रहा मगर कार्यालय कर्मचारियों ने उनसे आ कर बात तक नहीं की। इधर धरना प्रदर्शन कर रहे निवेशकों ने बताया है कि उन्होंने अपने जीवन भर की जमा पूंजी इसलिए सहारा में जमा की थी उनके आड़े वक्त उनके काम आयेगी, मगर अब किसी की बेटी की शादी है तो किसी के घर में बीमारी है| किसी को अपना लोन चुकाना है परन्तु सहारा है कि उनका भुगतान करने के बदले उन्हें सिर्फ समय दे रहा है| प्रदर्शन करने आए निवेशकों ने मामले को ले कर प्रशासन पर भी सवाल उठाया है कि इतने लंबे समय से चल रही इस गड़बड़ी की प्रशासन को खबर कैसे नही है और वो अपने स्तर पर अब तक कोई करवाई क्यों नही कर रहा है।
आज हुए धरने के बावजूद कई अन्य निवेशकों ने भी अपने भुगतान की मांग की जिसके जवाब में भी कार्यालय कर्मचारियों द्वारा उन्हे समय ही दिया गया है, और वो भी कोई स्पष्ट नहीं है |उनका कहना है कि उन्हे भी इस बात की सटीक जानकारी नहीं है कि भुगतान कब तक संभव होगा| आज इसी बात को ले कर जब हमारे संवाददाता ने रीजनल मैनेजर से बात की तो उन्होंने आश्वासन दिया की इस वर्ष मार्च के बाद कभी भी भुगतान शुरू हो सकता है| इस विषय पर उन्होंने पक्का कुछ नही कहा परन्तु सहारा सेबी के बीच चल रहे विवाद के समाधान होने तक भुगतान नही किया जा सकता की बात उनके द्वारा कही गई| बता दें की सहारा सेबी विवाद सहारा की सिर्फ दो स्कीमों को ले कर चल रहा है और निवेशक उक्त दोनों स्कीमों के अलावा चल रही अन्य स्कीमों का भुगतान मांग रहे हैं| इस लिहाज से अगर देखा जाए तो भुगतान के लिए सहारा सेबी विवाद का हवाला देना भी एक गैर जिम्मेदाराना जवाब है। फिलहाल मामले को ले कर जहां सहारा के एजेंट सहमे हुए हैं वहीं निवेशकों ने अब कड़ा रुख अपना लिया है| कार्यालय कमचारियों को देख कर ऐसा नही लगता कि उन्हे इन सब से कोई फर्क पड़ रहा हो|अगर ऐसा नही होता तो आज कम से कम वो धरने पर बैठे लोगों से मिल कर उनसे इस विषय पर बात जरूर करते| मगर बात करना तो दूर की बात कल कार्यालय आए कर्मचारियों में से आज कई कर्मचारी भी गायब ही नजर आए। मामले को ले कर सभी ने एक ही सवाल उठाया जो हमने कल भी उठाया था की अगर भुगतान नही हो रहा है तो कार्यालय खुला क्यों है, कार्यालय प्रबंधक क्यों नहीं है, क्या कोई बैंक लंबे समय तक बिना प्रबंधक के चलाया जाना चाहिए, और इसी जवाब का जवाब जब हमने रीजनल मैनेजर केशव झा से पूछा तो उन्होंने कहा कि अभी स्थितियां विपरीत है और विपरीत स्तिथि में कोई भी प्रबंधक के पद पर बना नही रहना चाहता, तो फिर सवाल है कि आखिर कार्यालय चला कौन रहा है। इधर जब हमने कुछ एजेंटों से भुगतान को ले कर बात की तब उन्होंने बताया की कार्यालय में काम कर रहे स्टाफ का कहना है कि 100 रूपया जमा कीजिए और 75 रुपए का भुगतान करवा लीजिए| मतलब जितने का भुगतान करना है उस राशि के अलावा 25% अतिरिक्त राशि कार्यालय में जमा करने का दबाव उन पर बनाया जा रहा है। इधर आज धरना प्रदर्शन करने आए निवेशकों ने कहा है कि ये सब यहीं खत्म नहीं होने वाला है, आगे हम इसके लिए एक कमिटी का गठन करेंगे और उस कमिटी में जो भी निवेशक चाहे जुड़ सकते हैं| उसके बात इस आंदोलन तेज किया जाएगा और इसके संबंध में जिला प्रशासन से भी बात की जाएगी| साथ ही सभी सहारा कार्यालय के कर्मचारियों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।

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