पंकज कुमार ठाकुर
आजकल मीडिया बिकाऊ हो गई, लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल पहले मीडिया का प्रारूप झंडा वरदार वामपंथी थे। वह वामपंथी अब दक्षिणपंथी हो चुके हैं। मीडिया का पूर्ण स्वरूप बदल चुका है। मीडिया अब कारपोरेट घराना कहिए, और लाजमी है इसमें बड़े पूंजीपतियों का निवेश है। पहले इसका भाव इंधन होता था अब हुजूर । रुपैया है। दरअसल इस बदलाव के बाद स्वाभाविक है । चरित्र पर भी असर दिखेगा। इसका यह मतलब नहीं है कि मीडिया बिक चुकी है। अब मीडिया नए रूप में है। जिसे एक विचारधारा की हार भी कह सकते हैं। और इसी हार को छुपाने के लिए बिकाऊ मॉडल का प्रारूप गढ़ा गया। अब बात शार्ट के मुद्दे की है। दरअसल राजनीति को जैसे आप और हम जन्म देंगे। और राजनीति सिस्टम को जन्म देगा।
गुस्ताखी माफ हुजूर




