रिपोर्ट – सुमित कुमार!
-मुंगेर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर मुंगेर पहुंचे। दोनों नेताओं ने जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और सदर प्रखंड के सीताकुंड उच्च विद्यालय परिसर में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिविर में रह रहे बाढ़ विस्थापित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उसके बाद वहां के मेडिकल कैंप आंगनबाड़ी केंद्र का भी जायजा लिया ।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मुंगेर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे हैं। राज्य सरकार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। राहत शिविर में व्यवस्थाओं को देखकर संतोष हुआ। उन्होंने बताया कि शिविर में बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। जब तक संबंधित इलाकों में पानी भरा रहेगा, तब तक बच्चों के लिए यहां आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत की गई है। कई परिवार पिछले 10 से 12 दिनों से शिविर में रह रहे हैं। यहां भोजन, दवा समेत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर केंद्र सरकार की ओर से बाढ़ की स्थिति और इससे हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। फसलों और पशुओं को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग की टीम भी क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता के रूप में सात हजार रुपये देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने मुंगेर के लोगों के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बारिश समाप्त होने के बाद मुंगेर से भागलपुर तक करीब 83 किलोमीटर लंबी एट -ग्रेड वाली सड़क बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस मार्ग पर एलिवेटेड सड़क बनाने की योजना थी, लेकिन अब एलिवेटेड सड़क के बजाय ऐसी सड़क बनाने पर काम किया जाएगा, जिससे मुंगेर से भागलपुर के बीच बाढ़ के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्या से भी लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बाढ़ के समय संपर्क व्यवस्था बेहतर करने में भी मदद मिलेगी।



