रिपोर्ट – निभाष मोदी!
कैंसर पीड़िता के 5 लाख के लिए तरस रही जिंदगी, वारंट के बाद भी मनोज वर्मा की गिरफ्तारी क्यों नहीं?
भागलपुर में खुद को डीएसपी बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी करने वाले पुलिस विभाग के डाकिया मनोज वर्मा पर शिकंजा कसने में पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। कैंसर पीड़िता समेत दर्जनभर से अधिक लोगों से ठगी के आरोपों के बीच आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। बांका के बाद भागलपुर के बाईपास थाने में भी उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं, बांका कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ितों में नाराजगी है।
मामले की सबसे दर्दनाक तस्वीर फोर्थ स्टेज कैंसर से जूझ रही सोनम भारती की है। सोनम का आरोप है कि मनोज वर्मा ने नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे अलग-अलग माध्यमों से करीब 5 लाख रुपये बैंक खाते में मंगवाए। पैसे देने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जब सोनम ने अपनी रकम वापस मांगी, तो कथित तौर पर उनका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया गया।
पीड़िता का आरोप है कि मनोज वर्मा के रिश्तेदार फोन कर उन्हें केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सोनम को पैसों की सख्त जरूरत है, लेकिन अपने ही पैसे वापस पाने के लिए उन्हें अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बीमारी और आर्थिक परेशानी के बीच न्याय की उम्मीद लेकर सोनम एक बार फिर भागलपुर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता राजीव सिंह के पास पहुंचीं।
इसके बाद सोनम ने आईजी कार्यालय में आवेदन देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने और अपनी 5 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई। पीड़िता चाहती हैं कि पुलिस जल्द आरोपी को गिरफ्तार करे और उनकी रकम वापस दिलाने की दिशा में कार्रवाई हो।
ठगी के शिकार लोगों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता राजीव सिंह का आरोप है कि मनोज वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी को कहीं न कहीं पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि मनोज वर्मा पर कृषि विभाग, एनटीपीसी समेत कई संस्थानों में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लेने के आरोप हैं। अब सवाल यह है कि कोर्ट का वारंट होने के बावजूद आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है?
क्या पुलिस आरोपी तक पहुंच नहीं पा रही है, या गिरफ्तारी में कोई अड़चन है? और गंभीर बीमारी से जूझ रही सोनम भारती के 5 लाख रुपये आखिर कब वापस मिलेंगे? इन सवालों का जवाब पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट होगा।
बाइट— सोनम भारती, ठगी की शिकार पीड़िता
बाइट— राजीव सिंह, पीड़िता के अधिवक्ता
बाइट— प्रमोद कुमार यादव, एसएसपी, भागलपुर



