सहरसा- वंश परंपरा और 1889 के वसीयतनामा के आधार पर न्यासधारी नियुक्ति का दावा!

SHARE:


संवाददाता :- विकास कुमार!

सहरसा-श्री कारू खिरहरी से जुड़े धार्मिक न्यास में न्यासधारी नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निरंजन कुमार ने अपनी नियुक्ति को लेकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी नियुक्ति पारिवारिक वंश परंपरा, पुराने वसीयतनामों और उत्तराधिकारीनामों के आधार पर हुई है। निरंजन कुमार के अनुसार, श्री कारू खिरहरी उनके पूर्वज थे और उनके वंश के आगे नहीं चलने के बाद पारिवारिक उत्तराधिकार उनके छोटे भाई लक्षण खिरहरी के वंश में चला गया। उन्होंने बताया कि 5 मार्च 1889 के मूल वसीयतनामा में महंत और प्रबंधक की नियुक्ति की परंपरा का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा के तहत समय-समय पर उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाते रहे हैं। उनके अनुसार, 3 जून 2024 को तारणी खिरहरी ने उन्हें उत्तराधिकारी एवं प्रबंधक नियुक्त किया, जिसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर धार्मिक न्यास परिषद द्वारा उनकी नियुक्ति की गई। निरंजन कुमार ने कहा कि उनके पास वंश परंपरा और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

BYTE :- धार्मिक न्यास परिषद अध्यक्ष निरंजन कुमार

Join us on: