अररिया : प्रसूता की मौत पर सदर अस्पताल में बवाल, शव के साथ सड़क जाम कर बवाल!

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रिपोर्ट – मो. मुर्शिद!

अररिया : सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत के बाद सोमवार को परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा. मृतका के परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध जताया. आक्रोशित लोगों ने सदर अस्पताल के मुख्य गेट के सामने शव रखकर चांदनी चौक-जीरोमाइल मुख्य मार्ग को जाम कर दिया. इस दौरान काफी संख्या में लोग सड़क पर जुट गए और दोषी चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे.

मृतका की पहचान सिकटी प्रखंड क्षेत्र के तीरा खाबदाह वार्ड संख्या 6 निवासी 27 वर्षीय अंजली कुमारी, पति बिट्टू कुमार के रूप में हुई है. घटना के बाद मृतका के परिवार में मातम का माहौल है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

26 अगस्त को प्रसव के लिए अस्पताल में कराया गया था भर्ती

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार अंजली कुमारी को प्रसव पीड़ा होने के बाद 26 अगस्त को अररिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद उसका ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन के बाद अंजली ने एक बच्चे को जन्म दिया.

बच्चे के जन्म के बाद परिजनों ने नवजात को बेहतर उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. वहीं अंजली का इलाज सदर अस्पताल में ही चल रहा था.

परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद से ही अंजली की तबीयत सामान्य नहीं थी. उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और धीरे-धीरे उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई. परिजनों के अनुसार मरीज को लगातार परेशानी हो रही थी. इसके बावजूद समय रहते उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर नहीं किया गया.

इलाज के दौरान सोमवार की सुबह हुई मौत

परिजनों के मुताबिक सोमवार की अहले सुबह अंजली की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. प्रसूता की मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों और उसके गांव से पहुंचे लोगों में आक्रोश फैल गया.

परिजनों ने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और कर्मियों से घटना को लेकर जवाब मांगा. उनका आरोप था कि यदि मरीज की हालत को समय रहते गंभीरता से लिया जाता और आवश्यकता पड़ने पर उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाता, तो संभव है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी.

हालांकि, मौत की वास्तविक वजह क्या रही और इलाज के दौरान किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

अस्पताल गेट के सामने शव रखकर किया प्रदर्शन

प्रसूता की मौत से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने सदर अस्पताल के मुख्य गेट के सामने शव रख दिया. इसके बाद चांदनी चौक-जीरोमाइल मुख्य मार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया.

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि इलाज में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित चिकित्सक और कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

सड़क जाम होने के कारण मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई. सड़क के दोनों तरफ कुछ समय के लिए वाहनों की कतार लग गई. इससे राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा.

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

सड़क जाम और प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची. एसआई अमित कुमार और एएसआई पुष्कर सिंह पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल पहुंचे और आक्रोशित परिजनों एवं ग्रामीणों से बातचीत शुरू की.

पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और पूरे मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया. लेकिन परिजन तत्काल दोषी चिकित्सकों और कर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अपनी जगह पर अड़े रहे.

काफी देर तक समझाने-बुझाने और जांच का भरोसा दिए जाने के बाद लोगों ने सड़क से जाम हटाया. इसके बाद मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका.

परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद अंजली की तबीयत लगातार खराब हो रही थी. इसके बावजूद उसकी स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम नहीं उठाए गए. परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत यदि सदर अस्पताल की क्षमता से बाहर थी तो उसे समय रहते हायर सेंटर भेजा जाना चाहिए था.

परिजनों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच के बाद यह सामने आना चाहिए कि ऑपरेशन के बाद मरीज को किस तरह का उपचार दिया गया और उसकी हालत बिगड़ने के बाद चिकित्सकों ने क्या कदम उठाए.

तीन सदस्यीय कमिटी करेगी मामले की जांच

सिविल सर्जन केके कश्यप ने बताया कि महिला का करीब पांच दिन पहले ऑपरेशन हुआ था. उन्होंने प्रसूता की मौत के कारण के संबंध में तत्काल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से परहेज किया.

सिविल सर्जन के अनुसार मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी गठित कर जांच कराने का आदेश दिया गया है. जांच कमिटी मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन और उसके बाद दिए गए इलाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगी.

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में यदि किसी चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

नवजात को निजी अस्पताल ले जाने पर भी दी जानकारी

नवजात को निजी अस्पताल में भर्ती कराए जाने के संबंध में सिविल सर्जन ने कहा कि परिजनों ने अपनी इच्छा के अनुसार बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती कराया होगा. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रसूता की मौत के संबंध में अभी जांच की आवश्यकता है. जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण तथा परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

फिलहाल, तीन सदस्यीय जांच कमिटी की रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं. वहीं मृतका के परिजन मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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