मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 10 एजेंडो पर लगी मुहर!

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रिपोर्ट- अमित कुमार!

राज्य के विकास, स्वच्छता, शिक्षा और ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं जिनका सीधा असर आम लोगों और युवाओं पर पड़ेगा। इस बैठक में लिए गए निर्णयों को अगर एक साथ देखा जाए तो सरकार का पूरा जोर रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर नजर आता है।

बैठक का सबसे चर्चित फैसला नगर निकायों में कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी प्लांट लगाने को लेकर है। अब शहरों में रोज निकलने वाले गीले और जैविक कचरे को यूं ही फेंकने की बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। इस कचरे को प्रोसेस करके उससे बायोगैस तैयार की जाएगी जो एक तरह की नवीकरणीय ऊर्जा है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शहरों में कचरे के निपटान की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही कचरे से निकलने वाली मीथेन जैसी हानिकारक गैस का उत्सर्जन भी घटेगा जिससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण मिलेगा। सीबीजी प्लांट लगने से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे क्योंकि प्लांट के संचालन, कचरा संग्रहण और रखरखाव के लिए लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा जब शहरों में बायोगैस का उत्पादन बढ़ेगा तो पेट्रोल और डीजल जैसे आयातित ईंधन पर निर्भरता भी धीरे धीरे कम होगी। इस पूरी व्यवस्था को सरकार पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रही है। यानी अब शहर का कचरा सिर्फ समस्या नहीं रहेगा बल्कि उसी से ऊर्जा बनाकर उसका दोहरा फायदा लिया जाएगा।

युवाओं को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने तकनीक और कौशल विकास के लिए भी बड़ा ऐलान किया है। एआई, डिजिटल तकनीक और नई तकनीकों के प्रशिक्षण के लिए 430 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना है ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रख सकें। इसी कड़ी में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई में नामांकन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब तक निजी आईटीआई में दाखिला अलग अलग तरीके से होता था लेकिन अब निजी आईटीआई की 50 प्रतिशत सीटों पर नामांकन बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद यानी बीसीईसीईबी के माध्यम से कराया जाएगा। इसका मतलब यह है कि निजी आईटीआई की आधी सीटें अब सरकारी प्रवेश प्रक्रिया से भरेंगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी और छात्रों को समान अवसर मिलेंगे।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने 950 करोड़ रुपये के वित्तीय सहायता प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। इसका लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा जो आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते। साथ ही निजी बीएड कॉलेजों को अब डिग्री महाविद्यालय की पढ़ाई कराने की भी अनुमति दे दी गई है जिससे उच्च शिक्षा के विकल्प और बढ़ेंगे।

ऊर्जा और बिजली के मोर्चे पर भी कई फैसले हुए हैं। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को राज्य में आगे बढ़ाने के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि मंजूर की गई है। इस योजना के तहत लोगों को सोलर के जरिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी में इंजीनियर के 221 नए पद भी सृजित किए गए हैं ताकि बिजली व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। राइट ऑफ वे से जुड़े त्रिपक्षीय समझौते को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है जो सड़क और बिजली लाइन जैसी परियोजनाओं के लिए जरूरी है। इसके अलावा ग्रीनफील्ड सैटेलाइट सिटी के लिए जमीन की खरीद बिक्री पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है जिससे शहरी विस्तार और निवेश को गति मिलेगी।

प्रशासनिक स्तर पर कैबिनेट ने IAS अधिकारी संजय कुमार की सेवा अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। वे सामान्य प्रशासन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे और 31 जुलाई 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति हुई थी। अब उन्हें संविदा के आधार पर 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2027 तक फिर से नियुक्त किया गया है। यानी रिटायरमेंट के बाद भी वे एक साल तक सरकार के साथ काम करते रहेंगे।

कुल मिलाकर इस कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले राज्य को स्वच्छ, तकनीकी रूप से सक्षम और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

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